खवासा

श्मशान नहीं, संस्कारों का धाम है खवासा का मुक्तिधाम,,,जहां अंतिम यात्रा को भी मिलता है सम्मान, खवासा का मुक्तिधाम बना संवेदनाओं का तीर्थ,,,मुक्तिधाम ऐसा कि हर कोई करे प्रशंसा….

#Jhabuahulchul 

खवासा@आयुष पाटीदार/आनंदीलाल सिसोदिया 

जीवन की भागदौड़ में इंसान बहुत कुछ हासिल करने की कोशिश करता है। कोई धन कमाता है, कोई पद और प्रतिष्ठा अर्जित करता है, तो कोई अपने सपनों को पूरा करने में जीवन बिता देता है। लेकिन जीवन की इस लंबी यात्रा का अंतिम सत्य एक ही है मृत्यु। इस सत्य के सामने न अमीरी मायने रखती है और न गरीबी, न ऊंचा पद और न बड़ा नाम। अंततः हर व्यक्ति को उसी अंतिम यात्रा पर निकलना होता है, जहां से फिर कोई लौटकर नहीं आता।

ऐसी अंतिम यात्रा के दौरान यदि परिजनों को सम्मान, सुविधा और शांति का वातावरण मिले तो यह किसी भी समाज की संवेदनशीलता और संस्कारों का परिचायक होता है। खवासा नगर के बाजना रोड स्थित मुक्तिधाम परिसर आज इसी संवेदनशील सोच का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। यह केवल अंतिम संस्कार का स्थान नहीं रहा, बल्कि सेवा, समर्पण, संस्कार और सामाजिक एकता का ऐसा प्रतीक बन गया है जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है।

कभी सामान्य रूप में दिखाई देने वाला यह मुक्तिधाम आज अपनी भव्यता, स्वच्छता और प्राकृतिक सुंदरता के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। नगर के जागरूक युवाओं, वरिष्ठजनों और समाजसेवियों ने वर्षों से इस परिसर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए। किसी ने आर्थिक सहयोग दिया, किसी ने श्रमदान किया, तो किसी ने पौधे लगाकर उन्हें वृक्ष बनने तक संभाला। यही कारण है कि आज मुक्तिधाम परिसर में खड़े विशाल वृक्ष मानो समाज के सामूहिक प्रयासों की कहानी बयां करते नजर आते हैं। 

करीब पांच वर्ष पहले यह मुक्तिधाम एक सामान्य परिसर था, लेकिन नगर के युवाओं और वरिष्ठजनों के प्रयासों ने इसकी तस्वीर बदल दी। आज यहां हरियाली, स्वच्छता और बेहतर व्यवस्थाओं का सुंदर संगम देखने को मिलता है। जो लोग पहले यहां आ चुके हैं, वे आज के इस परिवर्तन को देखकर मुक्तिधाम की सराहना किए बिना नहीं रह पाते।”

जब कोई व्यक्ति अपने किसी प्रियजन की अंतिम यात्रा में यहां पहुंचता है, तो उसे केवल शोक का वातावरण ही नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और शांत परिसर भी दिखाई देता है। चारों ओर हरियाली, छायादार वृक्ष, स्वच्छ वातावरण और आवश्यक सुविधाएं यह एहसास कराती हैं कि समाज ने अपने दिवंगत लोगों के सम्मान में कोई कमी नहीं छोड़ी है। यहां बैठने की उचित व्यवस्था है, पेयजल की सुविधा उपलब्ध है और पूरे परिसर का रखरखाव इस प्रकार किया गया है कि आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

कई बार अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। ऐसे अनेक लोगों ने खवासा मुक्तिधाम की व्यवस्थाओं की खुले मन से प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर मनुष्य की अंतिम विदाई होती है, वहां इतनी स्वच्छता, हरियाली और सुव्यवस्था विरले ही देखने को मिलती है। यही कारण है कि खवासा का मुक्तिधाम अब क्षेत्र के अन्य गांवों और नगरों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है।

मुक्तिधाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल सुविधाओं का विकास नहीं हुआ, बल्कि मानवीय भावनाओं का भी सम्मान किया गया है। जब किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटता है, तब उन्हें किसी व्यवस्था की चिंता न करनी पड़े, यही सोच यहां किए गए प्रत्येक कार्य में दिखाई देती है। यह स्थान मानो यह संदेश देता है कि जीवन के अंतिम क्षणों में भी सम्मान और संवेदना सबसे महत्वपूर्ण होती है।

खवासा के युवाओं और वरिष्ठजनों का यह प्रयास वास्तव में अनुकरणीय है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि समाज यदि एकजुट होकर किसी नेक कार्य का संकल्प ले, तो वह स्थान केवल एक परिसर नहीं रहता, बल्कि लोगों की भावनाओं और संस्कारों का प्रतीक बन जाता है।

आज खवासा का मुक्तिधाम केवल एक श्मशान घाट नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है जो बताती है कि इंसान की महानता केवल जीवन में किए गए कार्यों से नहीं, बल्कि समाज अपने दिवंगत लोगों को कितना सम्मान देता है, इससे भी आंकी जाती है। यही कारण है कि खवासा का यह मुक्तिधाम अब पूरे क्षेत्र में सेवा, संस्कार और सामाजिक समर्पण की एक अमिट पहचान बन चुका है।

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