सारंगी

जो व्यक्ति श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करता है उसके जीवन में सदाचार और चरित्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता हे…

भगवान का नाम स्मरण ही मुक्ति का सरल मार्ग है : पंडित कमलेश जी शास्त्री

सारंगी@संजय उपाध्याय

मनोहर सिंह राठौर, स्वर्गीय महेंद्र सिंह राठौर के पुत्र निर्मित सिंह राठौर एवं शक्ति सिंह राठौर के नीज निवास पर चल रही श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान योग कथा के चतुर्थ दिवस श्री कृष्ण जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया श्रद्धा भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अदबूध वातावरण निर्मित हुआ कथा श्रवण करने राठौर परिवार एवं नगर के भक्त कथा श्रवण कर रहे हैं दलोदा से आए कथा वाचक पंडित श्री केशव चतुर्वेदी राजा परीक्षित सुखदेव संवाद, सुखदेव जन्म जैसा कलयुग से मुक्ति के दिव्य उपायो का माध्यमिक वर्णन किया कथा श्रवण कर रहे श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे

शास्त्री जी ने कहा कि कलयुग में मनुष्य अनेक प्रकार के मानसिक तनाव, मोह, लोभ ,क्रोध और भौतिक आकर्षणों में उलझता जा रहा है ऐसे समय में भगवान के नाम का स्मरण सबसे सरल, शहद और कल्याणकारी मार्ग है उन्होंने कहा कि हरे कृष्ण, हरे कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे का निरंतर जब आत्मा को शुद्ध करता है तथा मनुष्य को ईश्वर के समीप ले जाता है की व्यास पीठ से पंडित जी ने बताया की साधु संतों का संघ धर्म ग्रंथो का अध्ययन सादगी पूर्ण जीवन संयम निस्वार्थ कर्म तथा प्रकृति के प्रति सम्मान ही मनुष्य को कलयुग के दुस प्रभावो से बचा सकते हैं जब मनुष्य अपने कर्मों का फल भगवान पर छोड़ देता है तभी उसके जीवन में वास्तविक शांति का उदय होता है

कथा के दौरान महाराज श्री ने राजा परीक्षित की प्रेरणादाई कथा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया श्री सुखदेव जी के उपदेश का वर्णन करते हुए कथा व्यास पीट से कहा कि मनुष्य आज्ञान वश अपना अमूल्य जीवन सांसारिक झगड़ो , मोह माया और विषय भोगों में व्यर्थ गवा देता है बाल्य काल खेलकूद में, युवावस्था परिवार और भौतिक आकर्षणों में तथा वृद्धावस्था रोगों में बीत जाती है भगवान के भजन के लिए समय ही नहीं बचता है उन्होंने कहा कि मोह समस्त दुखों और व्याधियों की जड़ है जो मनुष्य प्रारंभ से ही भगवान का भजन करता है वही जीवन में वास्तविक सुख और शांति प्राप्त करता है श्री कृष्ण का चिंतन,उनकी कथा, स्मृति और नाम स्मरण ही भवसागर से पार लगाने वाली नौका है अंत समय में जो व्यक्ति भगवान वासुदेव का नाम लेते हुए शरीर त्यागता है वह जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है

कथा के दौरान मधुर भजन और धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर झूम उठे पूरा कथा पंडाल राधे राधे और हरे कृष्ण के जय से गूंजायमायन हो उठा बड़ी संख्या में महिला ,पुरुष ,युवा एवं श्रद्धालु गण कथा श्रवण कर धर्म लाभ ले रहे हैं

प्रतिदिन भागवत कथा की महा आरती उतारी जा रही है एवं महाप्रसादी का वितरण किया जा रहा है

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