MPRDC की सड़क पर एयरटेल की खुदाई से ग्रामीणों में आक्रोश, PWD की अनुमति पर उठे सवाल…

रायपुरिया@राजेश राठौड़
झाबुआ जिले के रायपुरिया में निजी कंपनी (भारती एयरटेल लिमिटेड) द्वारा ऑप्टिक फाइबर केबल (OFC) बिछाने के लिए की जा रही सड़क खुदाई विवादों में आ गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिस सड़क पर खुदाई की जा रही है, वह MPRDC (मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम) के अंतर्गत आती है, जबकि कंपनी के पास अनुमति केवल PWD (लोक निर्माण विभाग) की है। इस लापरवाही से करोड़ों की लागत से बनी सड़क के क्षतिग्रस्त होने और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
नियमों की अनदेखी पर भड़के ग्रामीण
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ग्रामीणों के अनुसार, निजी कंपनी द्वारा जेसीबी मशीन से सड़क के किनारे करीब एक मीटर तक गहरी खुदाई की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2013-14 में लगभग 36 करोड़ रुपये की लागत से बामनिया से रायपुरिया तक बनी यह सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा है। मनमानी खुदाई से सड़क कमजोर हो रही है और बरसात में बड़े गड्ढे बनने से यहां गंभीर हादसे हो सकते हैं। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने कार्य का कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
PWD ने माना नियम विरुद्ध कार्य
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मामले में PWD के सब-इंजीनियर सुनील चौहान ने बताया कि नियमों के विपरीत कार्य होने की सूचना मिलते ही वरिष्ठ कार्यालय को लिखित में अवगत करा दिया गया है। विभाग द्वारा 22 जून को जारी पत्र में कंपनी को स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि दत्तिगांव-उमरकोट- तारखेड़ी-रायपुरिया मार्ग पर अनुमति की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि अनुमति सड़क के मध्य से 15-20 मीटर छोड़कर केबल डालने की दी गई थी, लेकिन कंपनी सड़क के किनारे को ही खोदकर क्षतिग्रस्त कर रही है।
एक ही सड़क, दो विभागों का पेंच
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ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क MPRDC की है, और अनुमति PWD की दिखाई जा रही है। जबकि कार्य देख रहे प्रकाश भायल और ठेकेदार का दावा है कि उनके पास PWD कार्यपालन यंत्री की एनओसी (क्रमांक 468, दिनांक 23/04/2026) है और वे उसी के अनुसार कार्य कर रहे हैं।
विभाग ने अनुमति पत्र में स्पष्ट किया था कि केबल मार्ग लेवल से 1.50 मीटर नीचे होनी चाहिए और कार्य के दौरान यातायात सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। यदि मार्ग निर्माण में खुदाई के कारण केबल क्षतिग्रस्त होती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी कंपनी की ही होगी।
क्या PWD द्वारा जारी अनुमति में MPRDC की सड़क को शामिल करना तकनीकी त्रुटि है? या फिर कंपनी ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए MPRDC की भूमि को भी खुदाई की जद में ले लिया है? फिलहाल, प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।




