वायरल वीडियो ने दिया बड़ा संदेश,,,स्कूल बस सुरक्षा पर जिलेभर में चले अभियान.. हर बच्चे को सुरक्षित घर पहुंचाने की बने व्यवस्था…

झाबुआ@जीतेंद्र बैरागी/आयुष पाटीदार
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। उक्त वीडियो कहां का है और कब का है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। साथ ही यह वीडियो झाबुआ जिले का भी नहीं है। लेकिन इस वीडियो में दिखाई गई घटना हर जिले के लिए एक बड़ा सबक जरूर छोड़ती है। हमारा उद्देश्य इस वीडियो को किसी स्थान विशेष से जोड़ना नहीं, बल्कि झाबुआ जिले में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर समय रहते जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को सामने लाना है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक बच्चा स्कूल बस से उतरने के बाद जल्दबाजी में सड़क पार करने लगता है। इसी दौरान वह तेज रफ्तार बाइक की चपेट में आ जाता है और सड़क पर गिर पड़ता है। यह घटना बताती है कि कई बार दुर्घटनाएं बस से उतरने के बाद होती हैं, जब बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मानो खत्म मान ली जाती है। जबकि सबसे अधिक सतर्कता की जरूरत उसी समय होती है।
झाबुआ जिले के निजी स्कूलों में प्रतिदिन हजारों बच्चे स्कूल बसों से सफर करते हैं। ऐसे में केवल बच्चों को बस से उतार देना ही पर्याप्त नहीं होना चाहिए। बस चालक और बस अटेंडेंट की जिम्मेदारी तब तक मानी जानी चाहिए, जब तक बच्चा सुरक्षित रूप से सड़क पार कर अपने घर या निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंच जाता। छोटे बच्चे अक्सर घर पहुंचने की जल्दी में बिना इधर-उधर देखे सड़क पर दौड़ पड़ते हैं और यही जल्दबाजी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
स्कूल संचालकों को चाहिए कि बसों में तैनात कर्मचारियों और अटेंडेंट को नियमित रूप से विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। उन्हें यह सिखाया जाए कि बच्चों को बस से उतारने के बाद हाथ पकड़कर सुरक्षित तरीके से सड़क पार करवाएं, यातायात रुकवाने का प्रयास करें और यह सुनिश्चित करें कि बच्चा सुरक्षित स्थान तक पहुंच गया है। बच्चों की सुरक्षा केवल नियमों से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से सुनिश्चित होती है।
साथ ही जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा जिले में संचालित निजी स्कूल बसों का नियमित विशेष जांच अभियान भी चलाया जाना चाहिए। बसों में सुरक्षा मानकों, फिटनेस, अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी, जीपीएस, प्रशिक्षित चालक-अटेंडेंट तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की समय-समय पर सघन जांच हो, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
जिला कलेक्टर, पुलिस प्रशासन, परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग को संयुक्त रूप से जिलेभर में “स्कूल बस सुरक्षा जागरूकता अभियान” शुरू करना चाहिए। सभी स्कूलों में बस सुरक्षा के मानकों की समीक्षा हो, बस स्टाफ का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए, सड़क सुरक्षा पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित हों और नियमित निरीक्षण भी किया जाए। यदि समय रहते ऐसे कदम उठाए गए, तो भविष्य में कई मासूम बच्चों को सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होने से बचाया जा सकता है।



