थांदला

शालाओं को घर समझकर संवारें, बच्चों का भविष्य हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी,,, एसडीएम भास्कर गाचले…संकुल प्राचार्यों, छात्रावास अधीक्षकों एवं शिक्षा अधिकारियों की संयुक्त बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वच्छता, करियर मार्गदर्शन और पर्यावरण संरक्षण पर दिए सख्त निर्देश…!

थांदला@आयुष पाटीदार 

शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के सुरक्षित, संस्कारित और उज्ज्वल भविष्य की नींव है। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) थांदला भास्कर गाचले ने शुक्रवार को संकुल प्राचार्यों, छात्रावास अधीक्षकों, बीआरसी, बीएसी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीओ) की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से विस्तृत दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में एसडीएम श्री गाचले ने कहा कि विद्यालय केवल भवन नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण के केंद्र हैं। इसलिए प्रत्येक शिक्षक अपनी शाला को अपने घर के समान समझे और उसी आत्मीयता, जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता के साथ उसकी स्वच्छता, रखरखाव एवं शैक्षणिक वातावरण को उत्कृष्ट बनाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं अनुशासित वातावरण में ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है और ऐसा वातावरण शिक्षकों की प्रतिबद्धता से ही निर्मित होता है।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा प्रत्येक पात्र विद्यार्थी की अपार (APAAR) आईडी समय-सीमा में बनाई जाए। साथ ही गणवेश, पाठ्यपुस्तकों एवं छात्रवृत्ति का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी विद्यार्थी शासन की सुविधाओं से वंचित न रहे।

मध्याह्न भोजन योजना की समीक्षा करते हुए एसडीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक विद्यालय में निर्धारित मेनू सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए तथा विद्यार्थियों को उसी के अनुरूप स्वच्छ, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। भोजन की गुणवत्ता एवं स्वच्छता में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

वर्षाकाल को देखते हुए उन्होंने विशेष रूप से जर्जर विद्यालय भवनों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां भवन मरम्मत योग्य हैं, वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए और जहां भवन असुरक्षित हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था कर बच्चों की पढ़ाई संचालित की जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी स्थिति में बच्चों को जर्जर भवनों में नहीं बैठाया जाए।

छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर विशेष जोर देते हुए एसडीएम श्री गाचले ने निर्देश दिए कि सभी छात्रावासों में नियमित साफ-सफाई, समय पर पौष्टिक भोजन, स्वच्छ पेयजल तथा मच्छरों से बचाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विशेष रूप से बालिका छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे पूर्णतः कार्यशील रहें, किसी भी कैमरे में खराबी न हो तथा किसी अनधिकृत व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।

उन्होंने सभी विद्यालयों में बालिका शौचालयों की उपलब्धता एवं उनकी कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि केवल निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका नियमित उपयोग, रखरखाव और स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए एसडीएम श्री गाचले ने वर्षाकाल में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक पौधे का संरक्षण, सिंचन और नियमित देखभाल करें, ताकि वह भविष्य में एक सशक्त वृक्ष बन सके। विद्यालयों एवं छात्रावासों को हरित परिसर बनाने के लिए विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए।

बैठक में उन्होंने इस बात पर भी विशेष बल दिया कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिक शिक्षा, अनुशासन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार भी दिए जाएं, जिससे वे भविष्य में जिम्मेदार एवं संवेदनशील नागरिक बन सकें।

उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एसडीएम ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि सभी हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों में कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए नियमित करियर मार्गदर्शन शिविर आयोजित किए जाएं। इन शिविरों में विशेषज्ञों एवं अनुभवी मार्गदर्शकों के माध्यम से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार एवं विभिन्न करियर विकल्पों की जानकारी दी जाए, ताकि वे अपने जीवन का सही लक्ष्य निर्धारित कर सकें।

बैठक के अंत में एसडीएम भास्कर गाचले ने कहा कि शासन की मंशा केवल विद्यालय संचालित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त एवं प्रेरणादायी शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि सभी अधिकारी, शिक्षक एवं छात्रावास अधीक्षक अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें, तो निश्चित रूप से सरकारी विद्यालय उत्कृष्ट शिक्षा के आदर्श केंद्र बने।

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