बजरंग चरित्र कथा का आयोजन एव अपार भीड़ पर भक्तगण भाव भक्ति में डूबे….

मेघनगर@मुकेश सोलंकी
प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पिपलखुटा धाम में आज कथा का हनुमानजी का प्राकट्य उत्सव के अंदर श्री रामानुज के मुखार बिंद से बताया कि मन्त्र के उच्चारण में वह ताकत है कि मानव जीवन का धन्य हो जाता है यज्ञ नारायण देव का भी उल्लेख किया है यज्ञ एव अग्नि में साक्षत देव विराजमान रहते है अग्नि का इतना प्रकोप रहता है कि पांखड का नाश करता है हर पंडित यज्ञ के उपरांत कहते है कि इस यज्ञ में मुझसे गलती हो तो मुझे छमा करना प्रभु मुझे अपराध हो जाता है में छमा चाहता हु भगवान शिव ने कहा कि जो प्राणी पूण्य ओर पाप से निर्वत हो जाता है उसका ही मोक्ष है जिस दिन पूण्य समाप्त हो जाता है उस दिन विनाश ही है यदि पूण्य का बैलेंस हो गा तो आप स्वर्ग के हकदार रहोगे जब हनुमानजी का जन्म हुआ तब माता अंजना की कोख में महादेव का प्राकटय होता है हनुमान जी का प्राकट्य होता है महादेव कहते है कि भगवान हनुमानजी अजन्मा है हनुमन्त के रूप में जन्म लेकर इस पृथ्वी का विकास होता है हनुमानजी की मान्यता ऐसी है कि संकट को हरने वाले है एव सभी को आशीर्वाद प्राप्त हो रामजी के दूत बनकर हमे सिखाते है कि हमे दुनिया का सुख चाहिए तो राम दूत का सुमिरण करने से ही मनोरथ कार्य पूर्ण हो जाते है जो पड़े हनुमान चालीसा उसका हर संकट हर जाता है एव संसार की समस्त शक्ति या प्राप्त हो जाती है एव सभी बंधनों से मुक्त रहकर जीवन खुशहाल रहता है महादेव कोन है यह त्रिभुवन गुरु श्री हनुमान जी ही है तुलसीदास जी ने कहा कि मन मे मेल यदि खत्म हो जाते है सभी को हनुमंत उपासना करना चाहिए आज भगवंत कृपा से हनुमानजी का जन्म हुआ एव दासी आई एव महाराज केशरी को कहा कि रानी अंजना की कोख से एक बालक का प्राकट्य हुआ स्वर्ग से अप्सरा नृत्य करने लगी सभी देवी देवताओं ने खुशियां मनाई चारों तरफ खुशीया ही खुशीया मनी हनुमान लला सबके प्यारे लला माता अंजना ने आँखे खोली भगवान हनुमानजी मा के आसपास खेलने लगे यह बालक प्रतापी है एव माता अंजना ने घोर तपस्या की थी एव एक ऋषि ने कहा कि आप वायु देव को प्रसन्न करो एव वायु देव की उपासना से ही बालक होगा केशरी नंदन ने बाल हनुमान को अंजना के हाथों में देते है ये बालक का तेज कितना है एव रूपवान भी है माता अंजना का दूध सुख गया कि मेरा बेटा वानर नही हो सकता है माता अंजना में वह ताकत थी अपना स्वरूप बदल सकती थी क्योंकि माता इतनी रुपवान थी कि दुनिया मे ऐसी कोई नारी नही थी वह अपने रूप के अहंकार में अपने सत्य को भूल गई थी इसी प्रकार आज के इस मानव जीवन मे रुप सता एव धन मिल जाता है तो अपने वाले को ही भुल जाता है अंजना कहती है कि मेरा बेटा बन्दर है इसको ले जावो अंजना नही मानी अंजना ने दूध ही नही पिलाया दिन भर रोते बिलखते रहे अंजना उनके तरफ देखती भी नही थी सभी ने माता को समझआया परन्तु नही मानी रात्रि में अंधकार हुआ बालक के रुदन के कारण मा अंजना का दिल पशिसने लगा ये इतना विलाप कर रहा है इसको अपना बेटा नही मानेगी महल के ऊपर माता बेटा को लेकर जाती है ऊपर की छत पर से बाल हनुमान को फेक ती है उस समय एक साहिका हनुमानजी को गिरते हुए बालक को अपने पलु में निचे गिरने के पहले झेल लेती है उस बालक को वायु देव के पास लेजाती है महाराज मेने यह बालक को गिरने से बचा लिया है आपके पास ले आयी हु वायु देव ने हनुमानजी को लेकर अपने पास रख लिया एव अंजना अपने कक्ष में आगयी एव बाद में उस बा लक की याद आने लगी भगवान ने जो दिया मेने स्वीकार क्यो नही किया अंजना विलाप करने लगी इतने में केशरी जी ने कक्ष में प्रवेश किया अपना बालक कहा है महाराज मुझसे अपराध हो गया केशरी जी ने देखा हनुमान लला नही है उनके ऊपर दुख का छाया पड़ गया मने कितनी साधना की तब बालक का जन्म हुआ सभी को कहा कि बालक को ढूढो उस समय वायु देव प्रकट हो गए केशरी जी ने कहा कि हम आपके वरदान को संभाल नही पाए एव रुदन करने लगें तब वायु देव ने कहा कि आपका बेटा सुरक्षित है तो केशरी जी भाव विहोर हो जाते है हनुमान लला खेल रहे थे वायु देव ने केशरी जी से वचन मांगा केशरी का बेटा नही यह वायु देव का बेटा माना जायेगा केशरी जी की साधना तप से भगवान शिव ने अंजना की कोख में जन्म लिया एव हनुमानजी अवतरित हुए केशरी जी ने माता को दूध पिलाने के लिए कहा एव दूध पिलाने से ही माता अंजना को मातृत्वसुख की प्राप्ति हुई चारो तरफ खुशियां मनाने लगे एव सभी भक्तगण नृत्य कर खुशिया मनाई हनुमानजी का नाम पवन तनय हुआ कथा 9 30 पर आरम्भ हुई एव 1 30 पर समापन हुआ पिपलखुटा महंत श्री दयारामदास एव सभी साधु विराजमान थे पिपलखुटा आश्रम में प्रतिदिन चाय दूध एव नाश्ता एव बैठक भी कुर्सी पर समय समयपर पानी की यवस्था एव कथा के उपरांत भंडारा की समुचित यवस्था कथा के जजमान भी सभी भक्तों का सवागत सत्कार में कोइकमी नही महसूस करने दी आज पांडाल पूरा भरा हुआ था रात्रि में रम्भा पुर मण्डल के मांगीलाल जी कठौता एव इनकी मण्डली द्वारा शानदार भजन कीर्तन का आयोजन भी हो रहा महंत श्री दयारामदास जी ने अधिक से अधिक भक्तो को पढराने की अपील की ग्राम रम्भा पुर एव बारह टोडी एव राजस्थान गुजरात प्रान्त के भक्तगण इस कथा का श्रवण कर अपने जीवन को धन्य मना रहे है के एव दूरदराज से आने वाले के आवास निशुल्क यवस्था आश्रम द्वारा की जा रही है




