बेटियो को सूरज की तरह बनाओ ताकि घूरने वाला जलकर खाक हो जाए,,साध्वी सुगना बाईसा….

श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण-रुक्मणी विवाह का वर्णन:छठवें दिन व्यास ने कंस वध, जरासंध युद्ध की भी चर्चा की, आस्था में डूबे श्रोता
रायपुरिया@राजेश राठौड़
श्रीसंकट मोचन सरकार बरवेट के पवन सानिध्य में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छटवे दिन एक अत्यंत सशक्त और प्रेरणादायक विचार को सभी श्रद्धुलुओ को समझाया।
उन्होंने कहा कि बेटियों को कोमल या केवल सुंदरता का प्रतीक (चांद) बनाने के बजाय, उन्हें आत्मनिर्भर, निडर और प्रभावशाली (सूरज) बनाए। ताकि आपकी लड़कियों को सशक्त बनाना है ताकि वे घूरने वाली नज़रों का शिकार न बनें, बल्कि सम्मान प्राप्त करें।
व्यास पीठ से साध्वी जी ने आव्हान करते हुए कहा कि अपनी बेटियों को कोमल या केवल सुंदरता का प्रतीक चांद नही बनाए की लोग घूरते रहे। उन्हें आत्मनिर्भर, निडर और प्रभावशाली सूरज की तरह तेज बनाए ताकि देखने वाला जल कर खाक हो जाए। कहने का मतलब यह है की अपनी लड़कियों को सशक्त बनाना है ताकि वे घूरने वाली नज़रों का शिकार न बनें, बल्कि आप गर्व से नजरे उठा कर चल सको। भगवतकथा के छटे दिन की आरती प्रसादी का लाभ प्रवीण कुमार अशोक कुमार भटेवरा परिवार की ओर से लिया।इस अवसर पर पूर्व विधायक वालसीह मेड़ा, हनुमंत सिंह डाबरी, अग्निनारायण सिंह बोडायता, अजयपालडीह राठौर बरवेट, दुर्गादास मोटापाला, विपुल लोढ़ा सहित आसपास के जिले से श्रोता जन कथा श्रमण करने के लिए पहुंच रहे है।
श्रीमद् भागवत कथा अमृत महोत्सव के छठवें दिन भगवान श्री कृष्ण द्वारा कंस वध , जरासंध युद्ध और श्री कृष्ण रुकमणी विवाह का वर्णन किया गया । जहां कथा व्यास साध्वी के श्रीमुख से वर्णन सुन श्रोता भक्त भावविभोर हो गए । वहीं श्रीकृष्ण रूक्मणी विवाह में श्रोता भक्त बराती बन झूमे। जिसका नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति से श्रोता भाव विभोर हुए।
कथा को आगे बड़ते हुए बताया कि जब भगवान श्री कृष्ण बड़े हो जाते हैं तो वह कंस की जेल में बंद अपने माता-पिता देवकी वासुदेव को छुड़ाने के लिए कंस का वध कर छुड़ा लाए । कंस वध से नाराज़ कंस के ससुर मगध के राजा जरासंध श्री कृष्ण से बदला लेने के लिए मथुरा पर सत्रह बार हमला किया । हर बार श्रीकृष्ण भगवान और बलराम पराजित कर छोड़ देते थे लेकिन मारते नहीं थे ।
अट्ठारहवीं बार श्रीकृष्ण भगवान मथुरावासियों को द्वारका में ले जाकर बसाया । श्रीमद् भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण पढ़ने गुरूकुल चले जाना , कालिया नाग का वध जरासंध युद्ध सहित अन्य भगवान की लीलाओं का वर्णन सुनकर भक्त भावविभोर हो गए ।
कथा व्यास सुगुणा बाईसा ने श्री कृष्ण विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विवाह के लिए जब कोई नंदगांव आता तो उनकी बाल लीलाओं को सुना वापस कर देते थे । जब विदर्भ देश के राजा की बेटी रुक्मिणी को लेकर भगवान श्रीकृष्ण द्वारकाधीश गए जहां आधे द्वारकावासी बाराती बने वहीं आधे जनाती बने और श्रीकृष्णा रूखमणी का विवाह संपन्न करवाया।
माता पिता की पूजा ही सबसे बड़ी पूजा है।
भागवत कथा के दौरान साध्वी जी ने माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से अपने माता-पिता की सेवा करता है, उसे तीर्थ यात्रा या भगवान की पूजा करने की आवश्यकता नहीं है। माता-पिता साक्षात देवता तुल्य हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही सारे तीर्थ हैं। उनकी सेवा से मिलने वाला पुण्य किसी भी पूजा से बहुत अधिक है। कहने का मतलब है कि जो संतान माता-पिता का सम्मान और सेवा करती है, उस पर भगवान की कृपा बनी रहती है। तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है, मां… ओ मां…. भजन पर सभी श्रोता की आखों से अश्रु धारा बहने लगी।
गौहत्या हत्या प्रतिबंधित कानून बने।
भागवत कथा में गौमाता के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि गौमाता आज भेड़ बकरियों की तरह काटी जा रही है।गौ हत्या पर रोकने के लिए एक कानून बनना चाहिए। ताकि गौहत्या पर नियंत्रण हो सके। साथ ही गौमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिया जाए। इसके लिए लिए संत समाज और विभिन्न संगठनों द्वारा देशव्यापी “गौ सम्मान आवाह्न अभियान” चलाया जा रहा है। 27 अप्रैल 2026 को ‘गौ सम्मान दिवस’ मनाकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। सर्व हिंदू समाज को मुहिम से जुड़कर गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गाय को संवैधानिक दर्जा दिलाए।
जो रात को जागते है वो निस्शाचार होते है
भागवत कथा को आगे बड़ते हुए साध्वी जी ने कहा कि जो देर तक जागता वो निशाचर हो जाता है। जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। जिससे शरीर में बीमारिया पनप रही है। रोजाना आदत तनाव बढ़ाती है। वर्तमान में मोबाइल भी निशाचर की संख्या बड़ा रहा है। इसीलिए अपने बच्चो को मोबाइल से दूर रखे या उनका ध्यान रखे





