तपती धूप और प्यासे बेजुबान,,, आखिर कौन जिम्मेदार..?..रामसागर के इस खाली होद का दर्द कौन समझेगा..?..दुआ न सही, कम से कम उनकी बददुआ तो न लें…

#Jhabuahulchul
खवासा@आयुष पाटीदार आनंदीलाल सिसोदिया
आजकल सूरज आग उगल रहा है और भीषण गर्मी ने सबका हाल बेहाल कर रखा है। ऐसे मौसम में हम इंसान तो बार-बार पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लेते हैं, लेकिन उन बेजुबान जानवरों का क्या जो बोल भी नहीं सकते..? रामसागर के पास बना पशुओं का होद आज लापरवाही की वजह से खाली पड़ा है
हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदारों द्वारा पुराने ढांचे को पूरी तरह तोड़कर लाखों रुपए की भारी-भरकम लागत से यहाँ नया होद बनाया गया था। लेकिन विडंबना देखिए कि लाखों खर्च करने के बाद भी यहाँ पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
वहीं एक और बड़ी समस्या यह है कि होद की ऊंचाई जरूरत से ज्यादा रखी गई है, जिसके कारण पशुओं को पानी पीने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार जानवर पास तक पहुंचकर भी पानी नहीं पी पाते और प्यासे ही लौटने को मजबूर हो जाते हैं। होद के आसपास मेहरम (कचरे/गंदगी) का अंबार लगा हुआ है, जिससे स्थिति और भी बदतर हो गई है। साफ-सफाई की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है इस होद के पास छाया दार व्यवस्था भी नहीं हे..?
दूर-दूर से गाय और भैंसें उम्मीद लेकर यहाँ आती हैं कि शायद दो घूंट पानी मिल जाए, लेकिन उन्हें यहाँ सिर्फ सूखा और चारों तरफ फैली गंदगी ही मिलती है।
हैरानी की बात है कि जिस जगह को जानवरों की प्यास बुझाने के लिए बनाया गया था, वहां आज धूल उड़ रही है। बिना पानी के ये जानवर इस चिलचिलाती धूप में यहाँ-वहाँ भटकने को मजबूर हैं।
सोचिए, जब हमें एक घंटा पानी न मिले तो हम तड़प उठते हैं, तो इन बेजुबानों पर क्या बीत रही होगी..? ऊपर से आसपास फैली गंदगी ने इस जगह को और भी बदतर बना दिया है।
आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है..? क्या जिम्मेदारों को इन मासूम जानवरों की तकलीफ नजर नहीं आती…? यह सिर्फ एक होद के खाली होने की बात नहीं है, यह हमारी इंसानियत पर भी सवाल है।
झाबुआ हलचल उन जिम्मेदारों से अपील करता हैं कि वह जल्द से जल्द इस होद की सफाई करवाए और इसमें पानी भरवाए, ताकि प्यास से भटकते इन बेजुबानों को राहत मिल सके। प्यास से तड़पते जानवरों की दुआ न सही, कम से कम उनकी बददुआ तो न लें।





