झाबुआपेटलावद

बेटियां बोझ नहीं, भाग्य होती हैं: अनिका की बुझती सांसों को ‘जीवनदान’ देने के लिए एकजुट होगा पेटलावद,,,अनिका की जिंदगी एक 9 करोड के इंजेक्शन पर टिकी है-जो सिर्फ अमेरिका से आता है…

#Jhabuahulchul 

झाबुआ@आयुष पाटीदार ✍🏻

अनिका शर्मा हाल के दिनों में मध्य प्रदेश के इंदौर की एक 2 साल की मासूम बच्ची के रूप में चर्चा में हैं, जो स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) टाइप-2 नामक एक अत्यंत दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं।

कहते हैं कि बेटियां घर की दहलीज की रौनक और आंगन की बरकत होती हैं, लेकिन जब वही बेटी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हो, तो पूरे समाज का अस्तित्व दांव पर लग जाता है। आगामी 23 अप्रैल 2026, गुरुवार को पेटलावद की सड़कों पर मानवता का कारवां उतरेगा, जब 2 साल की नन्ही अनिका शर्मा अपनी लड़खड़ाती सांसों के लिए इस शहर से ‘जीवनदान’ मांगने आएगी।

जो दुनिया आज भी बेटियों को ‘पराया धन’ या ‘बोझ’ मानकर उनके अस्तित्व को नकारती है, उसे अनिका का यह संघर्ष एक कड़ा सबक सिखाने जा रहा है। अनिका एसएमए टाइप-2 (SMA Type-2) जैसी उस दुर्लभ और क्रूर बीमारी की चपेट में है, जिसने उसकी मांसपेशियों को कमजोर कर दिया है, लेकिन उसके जीने के हौसले को नहीं तोड़ पाई है। 9 करोड़ रुपये का वह इंजेक्शन, जो सरहदों के पार अमेरिका से आना है, आज इस मासूम की जिंदगी और हमारी इंसानियत के बीच खड़ा है।

अनिका के माता-पिता का पेटलावद पर वह ‘भरोसा’ एक बड़ी जिम्मेदारी है, जो उन्होंने इस शहर की मिट्टी पर जताया है। यह लड़ाई महज एक बच्ची को बचाने की नहीं है, बल्कि उस सोच को बदलने की है जो बेटियों को कमजोर समझती है। अक्सर लोग कहते हैं कि बेटियां पालना कठिन है, लेकिन जरा उस पिता के दर्द को महसूस कीजिए जो अपनी लाड़ली की आंखों में रोज बुझती हुई लौ देख रहा है, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसके पास करोड़ों रुपये नहीं हैं। क्या एक मासूम का बचपन चंद कागज के नोटों की भेंट चढ़ जाएगा..? क्या पेटलावद की ममता एक बेटी की पुकार सुनकर चुप रह पाएगी।।? बिल्कुल नहीं..! पेटलावद ने हमेशा साबित किया है कि यहाँ का हर नागरिक एक संरक्षक है, एक बड़ा भाई है और एक पिता है।

गुरुवार को होने वाला यह आयोजन केवल धन जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि बेटियों के प्रति हमारे सम्मान की परीक्षा है। हमें यह दिखाना है कि अनिका बोझ नहीं, बल्कि इस माटी की अपनी बेटी है और उसकी रक्षा करना हम सबका सामूहिक धर्म है। नौ करोड़ की रकम पहाड़ जैसी जरूर है, लेकिन जब हजारों नेक दिल इंसान एक साथ दुआ और दवा के लिए हाथ बढ़ाएंगे, तो यह पहाड़ भी राई बन जाएगा।

आइए, हम सब मिलकर इस गुरुवार को एक ऐसा संकल्प लें कि दुनिया देखे और कहे कि पेटलावद में एक भी बेटी खुद को अकेला न समझे।

अनिका की मुस्कान वापस लाना ही हमारा असली लक्ष्य है, क्योंकि जब एक बेटी बचती है, तो एक भविष्य बचता है, एक वंश बढ़ता है और मानवता मुस्कुराती है। इस जंग में अनिका को अकेला मत छोड़िए, क्योंकि वह इस शहर की वो साख है जिसे हमें हर कीमत पर बचाना है।

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