सारंगी

जमाना बदल गया पर यह नहीं बदले , 85 वर्षीय गणपत लाल परमार आज भी रेडियो पर समाचार एवं गाने का आनंद ले रहे हैं…

सारंगी@संजय उपाध्याय

आज के आधुनिक दौर में मनोरंजन और जानकारी के लिए जहां मोबाइल, टीवी और इंटरनेट जैसे कई आधुनिक साधन उपलब्ध हैं, वहीं सारंगी ग्राम के 85 वर्षीय गणपत लाल परमार आज भी पुराने रेडियो के माध्यम से समाचार और गीतों का आनंद लेते हैं।

गणपत लाल परमार पूर्व में रतलाम कलेक्टर कार्यालय के नकल विभाग में बाबू पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद वे अपने गृह ग्राम सारंगी में निवास कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि वे दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, इसके बावजूद आज भी घर पर बैठकर लोगों के आवेदन लिखने और उनकी समस्याओं के समाधान में सहयोग कर रहे हैं। उनकी पत्नी भी दोनों पैरों से दिव्यांग हैं।

जब संवाददाता ने उनसे मुलाकात की, तब वे अपने पुराने रेडियो पर गीत सुन रहे थे। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें टीवी देखने में रुचि नहीं है। उनका यह पुराना रेडियो ही उनका सबसे बड़ा साथी है।

उन्होंने कहा कि वे दिनभर रेडियो पर प्रादेशिक समाचार, राष्ट्रीय समाचार, गीत-संगीत और अन्य कार्यक्रम सुनते रहते हैं। रेडियो से उन्हें देश-दुनिया की पूरी जानकारी मिल जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में लोग रेडियो का उपयोग लगभग भूल चुके हैं, लेकिन उनके अनुसार सारंगी गांव में शायद वे अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो आज भी नियमित रूप से रेडियो सुनते हैं।

तकनीक के इस आधुनिक युग में गणपत लाल परमार की रेडियो के प्रति यह लगन पुरानी यादों और सादगी भरे जीवन की एक अनोखी मिसाल पेश करती है।

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