ओवरब्रिज और बायपास की धीमी रफ्तार ने बामनिया के अतिक्रमण को दिया “जीवनदान”, जाम से राहत अब भी दूर।

बामनिया@जितेंद्र बैरागी
रतलाम-झाबुआ स्टेट हाईवे का निर्माण कार्य अब बामनिया तक पहुंच चुका है। रतलाम से झाबुआ मार्ग के अधिकांश छोटे-बड़े गांवों में सड़क का चौड़ीकरण कर आधुनिक और सुगम मार्ग तैयार किया गया, लेकिन बामनिया और उसके आसपास करीब साढ़े चार किलोमीटर का हिस्सा आज भी पुराने ढर्रे पर ही दिखाई दे रहा है। यहां केवल डामरीकरण कर औपचारिकता निभा दी गई, जबकि सड़क की चौड़ाई बढ़ाने या स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया।
मार्ग निर्माण के दौरान कई गांवों में लोगों ने स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाया, तो कहीं प्रशासन ने स्थायी और अस्थायी अतिक्रमण हटाकर सड़क को चौड़ा किया। नियम अनुसार सड़क सीमा में आने वाली सरकारी भूमि पर निर्माण कार्य किया गया, जिससे यातायात व्यवस्था बेहतर बन सके।
लेकिन बामनिया में स्थिति इसके विपरीत नजर आई। नगर के भीतर सड़क का दायरा जस का तस बना हुआ है। वर्षों से चली आ रही जाम की समस्या आज भी वैसी ही बनी हुई है और हाईवे निर्माण के बाद भी लोगों को राहत मिलती नहीं दिख रही।
नगरवासियों का मानना है कि यदि समय रहते सड़क चौड़ीकरण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होती तो बामनिया को भी बेहतर यातायात सुविधा मिल सकती थी। फिलहाल ओवरब्रिज और प्रस्तावित बायपास की चर्चा तो लगातार हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम आगे नहीं बढ़ने से अतिक्रमण को मानो “जीवनदान” मिल गया है।
अब नगर की उम्मीदें केवल बायपास मार्ग की स्वीकृति और निर्माण पर टिकी हैं। जब तक बायपास नहीं बनता, तब तक बामनिया को जाम, अव्यवस्थित यातायात और रोजाना की परेशानी से जूझना पड़ सकता है।




