नन्हे बच्चों ने पलाश की डालियों से मांगी अच्छी बारिश, किसानों ने खेतों में किया हल पूजन…

रायपुरिया@राजेश राठौड़
ग्रामीण अंचलों में आज भी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराएं जीवंत रूप में देखने को मिलती हैं। अक्षय तृतीया (आखातीज) के पावन अवसर पर रायपुरिया सहित आसपास के गांवों में आस्था, उल्लास और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। इस दिन जहां एक ओर नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पारंपरिक रीति से अच्छी वर्षा की कामना की, वहीं किसानों ने खेतों में पहुंचकर हल पूजन कर कृषि कार्य की शुरुआत का संकेत दिया।
आखातीज के अवसर पर सुबह से ही गांवों में विशेष चहल-पहल रही। छोटे-छोटे बच्चे हाथों में पलाश के पेड़ की डालियां लेकर समूह बनाकर घर-घर पहुंचे। परंपरा के अनुसार, बच्चे प्रत्येक घर के आंगन या द्वार पर पहुंचकर पलाश की डाली को जमीन पर पटकते हैं और अपनी स्थानीय बोली में पारंपरिक गीत “खारे ने मारे ढोकला, माता पुर चलावे” गाते हैं। इस दौरान घर की महिलाएं बाहर निकलकर पानी से भरा लोटा लेकर बच्चों पर पानी की बौछार करती हैं। ग्रामीण मान्यता है कि यह परंपरा इंद्रदेव को प्रसन्न करने का प्रतीक है और इससे आने वाले मानसून में अच्छी बारिश होती है।
इस लोक अनुष्ठान में सामाजिक समरसता की भी झलक देखने को मिलती है। बच्चे जब यह रस्म निभाते हैं तो ग्रामीणजन उन्हें अनाज, गुड़ या नकद राशि भेंट स्वरूप देते हैं। इससे बच्चों में उत्साह बना रहता है और परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है।
दूसरी ओर, किसानों के लिए भी आखातीज का दिन विशेष महत्व रखता है। इसे खेती-बाड़ी की तैयारियों का शुभारंभ माना जाता है। सुबह से ही किसान अपने-अपने खेतों पर पहुंचे और विधि-विधान से भूमि एवं कृषि उपकरणों का पूजन किया। हल, बैल और खेत की मिट्टी का तिलक कर धूप-दीप के साथ पूजा अर्चना की गई। इसके बाद किसानों ने सांकेतिक रूप से हल चलाकर कृषि कार्य का श्रीगणेश किया।
किसानों का मानना है कि आखातीज का अबूझ मुहूर्त नई फसल के लिए शुभ संकेत देता है और इस दिन किया गया कार्य पूरे वर्ष फलदायी होता है। यह परंपरा किसानों को समय पर खेती की तैयारियों के प्रति जागरूक करती है और उन्हें मानसून के स्वागत के लिए प्रेरित करती है।
इस प्रकार रायपुरिया अंचल में आखातीज का पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और कृषि जीवन के गहरे संबंधों को भी सशक्त रूप से प्रदर्शित करता नजर आया।




