नानी बाई का मायरा कथा का भव्य समापन: भक्त की पुकार पर दौड़े चले आए सांवरिया सेठ…

रायपुरिया@राजेश राठौड़
नगर में आयोजित प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन उपलक्ष्य में तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा कथा का भावपूर्ण समापन हुआ। अंतिम दिन कथा स्थल श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से खचाखच भरा रहा।
कथा व्यास पंडित श्याम सुंदर त्रिवेदी ने अपनी सुमधुर वाणी से नानी बाई के मायरे का प्रसंग सुनाते हुए उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। पंडित त्रिवेदी ने कथा के दौरान जीवन दर्शन की सीख देते हुए कहा कि घर में जो भी भोजन बने, उसका सर्वप्रथम बाल गोपाल को भोग लगाना चाहिए और फिर गाय व कुत्ते को ग्रास खिलाने के पश्चात ही स्वयं ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने भक्त नरसिंह मेहता की निष्ठा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान अपने भक्तों की व्याकुलता कभी सहन नहीं करते। जब भक्त सच्चे मन से पुकारता है, तो परमात्मा को स्वयं मदद के लिए आना ही पड़ता है। यही कारण था कि नरसिंह मेहता की लाज रखने के लिए स्वयं भगवान श्री कृष्ण 56 करोड़ का मायरा लेकर पंडाल में पहुंचे। जैसे ही कथा में भगवान के रथ आगमन का प्रसंग आया, पूरा पंडाल ‘सांवरिया सेठ’ के जयकारों से गूंज उठा।
कथा के मार्मिक प्रसंगों ने पिता और पुत्री के पवित्र रिश्ते की गहराई को भी उजागर किया। पंडित जी ने कहा कि एक बेटी अपने ससुराल में पिता की बुराई कभी सहन नहीं कर सकती और पिता के प्रति उसका प्रेम निस्वार्थ होता है। विदाई के समय पिता और पुत्री का स्नेह आँखों से आंसुओं के रूप में बह निकलता है। इस प्रसंग को सुनकर पांडाल में मौजूद हर श्रद्धालु की आँखें नम हो गईं। आयोजन के दौरान मायरा भरने का सौभाग्य ग्राम के गेंदालाल पाटीदार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के अंत में भव्य आरती की गई और सभी भक्तों को प्रसादी वितरित की गई। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के सदस्यों ने इस सफल आयोजन के लिए सभी नागरिकों का आभार व्यक्त किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन अशोक पाटीदार द्वारा किया गया।




