जर्जर छत और प्लास्टिक पन्नी के भरोसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र,,,मरीजों की सुरक्षा के लिए चिकित्सक ने खुद संभाली कमान….

रायपुरिया@राजेश राठौड़
स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के सरकारी दावों के बीच रायपुरिया का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार नजर आ रहा है। लगभग 30 वर्ष पूर्व निर्मित इस अस्पताल की बिल्डिंग अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और पहली ही बारिश ने इसकी बदहाली की पोल खोल दी है। आलम यह है कि बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण मरीजों के उपचार में भारी परेशानी हो रही है। इस विकट स्थिति से निपटने और मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रताप भूरिया ने खुद पहल करते हुए छत पर प्लास्टिक पन्नी बिछाने का बीड़ा उठाया, ताकि उपचार के दौरान मरीजों को भीगने से बचाया जा सके।
यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई है, बल्कि पिछले वर्ष भी बरसात के दौरान छत से पानी का रिसाव होता रहा था। उस समय भी चिकित्सकों ने वरिष्ठ अधिकारियों को इस जर्जर स्थिति से अवगत कराया था, लेकिन जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, जिसका खामियाजा आज मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। इस स्वास्थ्य केंद्र की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां रायपुरिया सहित आसपास के 40 से 45 गांवों की लगभग 40 हजार की आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर है। इसके अतिरिक्त, थाना क्षेत्र के 115 गांवों में होने वाली दुर्घटनाओं और इमरजेंसी के मामलों में भी प्राथमिक उपचार के लिए मरीज यहीं लाए जाते हैं।
अस्पताल में स्टाफ तो पर्याप्त है, लेकिन बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में भवन अब छोटा साबित होने लगा है। ओपीडी में प्रतिदिन 50 से 60 मरीज और माह में 40 से 50 प्रसूति मामले दर्ज किए जाते हैं, जिसके लिए अस्पताल में अतिरिक्त कक्षों की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है। मौजूदा जर्जर इमारत मरीजों के साथ-साथ चिकित्सा स्टाफ के लिए भी किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। इस गंभीर मसले पर सीएमएचओ डॉ. एम. एल. चौपड़ा ने स्वीकार किया है कि रायपुरिया स्वास्थ्य केंद्र में समस्या बनी हुई है और विभाग की ओर से फिलहाल मरम्मत के साथ-साथ नए भवन निर्माण का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भिजवा दिया गया है। अब देखना यह है कि मरीजों की इस परेशानी का स्थायी समाधान कब तक होता है।





