रिश्ता को बचाना है तो समय रहते पूछ लिया करो क्या हुआ,, पंडित केशव चतुर्वेदी…

रायपुरिया@राजेश राठौड़
ग्राम बरवेट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भागवत वक्ता केशव चतुर्वेदी खाचरोद वाले ने रिश्तो को बचाने के लिए प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि रिश्तों को बचाना है तो समय पर रिश्तों को अहमियत देना चाहिए ताकि रिश्तों में प्रगाढ़ प्रेम बना रहे। रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए गलतफहमियों को समय रहते पूछकर दूर कर लेना चाहिए, वरना महाभारत जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कथा में पारिवारिक सौहार्द और बड़े भाई को पिता समान सम्मान देना चाहिए।
श्रीचतुर्वेदी ने कहा कि श्रद्धालुओ को संदेश देते हुए कहा कि रिश्तों में कड़वाहट या दूरी आने पर “क्या हुआ” पूछ लेना रिश्ते को बचा लेता है। आपकी चुप्पी दूरियों को बढ़ा देती है। परिवार में रिश्ता बचाने के लिए कर्म और भक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जीवन के अंतिम समय में धन-संपदा पद की नहीं, केवल कर्म और भक्ति साथ चलते हैं। अगर आपके पारिवारिक रिश्तों में सम्मान और प्रेम है तो आप पर भगवान की कृपा बनी हुई है। जो अपने बड़े भाई को पिता के समान समझता है, जो छोटे भाई के लिए सच्चा रक्षक और मार्गदर्शक होता है। अगर आपके आपसी पारिवारिक रिश्तों में प्रेम, विश्वास और समय पर की गई बातचीत ही रिश्तों को मजबूत बनाती है।
श्रीचतुर्वेद ने श्रद्धालुओ ने राजा परीक्षित शुकदेव जन्म सहित अन्य प्रसंग सुनाया। शुकदेव परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार परीक्षित महाराज वन में चले गए। उनको प्यास लगी तो समीक ऋषि से पानी मांगा। ऋषि समाधि में थे, इसलिए पानी नहीं पिला सके। परीक्षित ने सोचा कि साधु ने अपमान किया है। उन्होंने मरा हुआ सांप उठाया और समीक ऋषि के गले में डाल दिया। यह सूचना पास में खेल रहे बच्चों ने समीक ऋषि के पुत्र को दी। ऋषि के पुत्र ने शाप दिया कि आज से सातवें दिन तक्षक नामक सर्प आएगा और राजा को जलाकर भस्म कर देगा। समीक ऋषि को जब यह पता चला तो उन्होंने दिव्य दृष्टि से देखा कि यह तो महान धर्मात्मा राजा परीक्षित हैं और यह अपराध इन्होंने कलियुग के वशीभूत होकर किया है। समीक ऋषि ने जब यह सूचना जाकर परीक्षित महाराज को दी तो वह अपना राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंपकर गंगा नदी के तट पर पहुंचे। वहां बड़े ऋषि, मुनि देवता आ पहुंचे और अंत में व्यास नंदन शुकदेव वहां पहुंचे। शुकदेव को देखकर सभी ने खड़े होकर उनका स्वागत किया। कथा सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा के दौरान धार्मिक गीतों पर श्रद्धालु जम कर झूमें। कथा में दूसरे दिन बड़ी संख्या में महिला-पुरूष कथा सुनने पहुंचे।




