जीवन में मर्यादा का पालन ही विजय और आत्म-संतोष का मार्ग है साध्वी श्री सुगुणा बाईसा…

रायपुरिया@राजेश राठौड़
नगर के पूर्व दिशा में स्थित श्री संकट मोचन सरकार के सानिध्य में चल रही भागवत कथा के पांचवे दिन साध्वी जी ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा हमारे जीवन में मर्यादा का पालन ही विजय और आत्म-संतोष का मार्ग है।
श्रीमद्भागवत कथा हमें सिखाती है कि जीवन में मर्यादा का पालन ही विजय और आत्म-संतोष का मार्ग है, जबकि अमर्यादित आचरण अनिवार्य रूप से पतन और हार का कारण बनता है। साध्वी जी ने कहा कि भागवत कथा वह ज्ञान-यज्ञ है जो जीवन को मर्यादा के साथ जीना और मृत्यु को शांति से स्वीकार करना सिखाती है। मर्यादा ही वह सूत्र है जो प्रेम और जीवन को सार्थक बनाना सिखाती है, जबकि अमर्यादित व्यवहार सब कुछ नष्ट कर देता है।
साध्वी जी ने मर्यादा और अमर्यादा का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान राम और कृष्ण ने मर्यादित जीवन जिया। मर्यादित जीवन, भले ही कठिन लगे, अंततः विजय और शांति लाता है। कथा के पांचवे दिन की आरती एव प्रसादी का लाभ सतीश कुमार पाटीदार परिवार ने लिया वही भगवान गोवर्धन को छप्पन भोग की प्रसादी को भोग लगाया।
कथा को आगे बढ़ाते हुए श्री साध्वी ने गोवर्धन पूजा लीला का वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। साध्वी ने बताया कि ब्रजवासी इंद्रदेव की पूजा की तैयारी कर रहे थे।
भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गोवर्धन पूजा करने का सुझाव दिया। इससे क्रोधित होकर इंद्रदेव ने भारी वर्षा की। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर मथुरा, गोकुल और वृंदावन के लोगों की रक्षा की। इंद्रदेव ने अपने घमंड के लिए क्षमा मांगी और वर्षा रुक गई।
तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई। कथा में गोचरण लीला, अघासुर वध, कालिया नाग पर नृत्य और चीर हरण लीला का भी वर्णन किया गया। पंडाल को सुंदर तरीके से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने गोवर्धन महाराज की प्रतिमा के समक्ष नृत्य किया। उनकी पूजा अर्चना कर परिक्रमा की।
इस अवसर पर हनुमान जी के परम भक्त स्वामीजी महाराज का स्वागत अतिथि के सदस्य द्वारा किया गई। इस अवसर जामली, सारंगी, कारदावद, पेटलावद, बामनिया, खवासा सहित रतलाम, उज्जैन धार इंदौर आदि स्थानों से श्रद्धालु कथा श्रमण करने के लिए पहुंच रहे है।





