करवड़

इंजेक्शन और कांच की खाली बोतल रोड पर फेंकी जा रही,,,,,प्रशासन के आदेश रद्दी की टोकरी में…

करवड़@सूरज गामड़ 

जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर चल रही अवैध दुकानों ने अब न केवल इंसानी जान को खतरे में डाल दिया है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। झाबुआ जिले के ग्राम करवड़ में झोलाछाप (अवैध) चिकित्सकों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि वे बायो-मेडिकल वेस्ट (Bio-Medical Waste) जैसे खतरनाक कचरे को खुलेआम रोड पर फेंक रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा ‘खेल’
ग्राम करवड़ में अवैध चिकित्सक बिना किसी डिग्री और डर के अपनी दुकानें चला रहे हैं। हद तो तब हो गई जब करवड़-बारी गांव केसरपुरा रोड पर स्थित कचरा संग्रहालय बना हुआ है फिर भी अवैध झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा भारी मात्रा में उपयोग किए हुए इंजेक्शन, खाली बोतलें और अन्य मेडिकल कचरा रोड पर दो-तीन दिन से पड़ा मिला। यह कचरा न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर बीमारियों को न्योता दे रहा है।

आमजन पर खतरा

जिस स्थान पर यह बायो-मेडिकल वेस्ट फेंका जा रहा है, वही पास में स्थित ग्राम पंचायत का कचरा संग्रहालय बना है। फिर भी इन झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा बायो वेस्ट कचरा खुले रोड पर फेंक रहे हैं स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रोड से चार-पांच गांव के लोगों का आना-जाना दिन भर रहता है स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे भी इसी रोड से आना-जाना करते हैं

संक्रमण का डर: खुले में पड़े सुई और कांच की बोतलों से संक्रमण (Infection) फैलने का अंदेशा बना हुआ है।
पर्यावरण नुकसान: मेडिकल कचरा सामान्य कचरा नहीं है; इसे नष्ट करने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। इसे खुले में फेंकना जमीन को जहरीला बना रहा है। इस कचरा संग्रहालय के आसपास दिन भर मवेशी गाय भैंस बकरी जैसे पशु दिन भर चारा खाता हैं जिससे पशु पालकों में डर का माहौल है पशुपालकों का कहना है की हमारे जानवर दिन भर कचरा संग्रहालय के पास चारा घास खाते हैं जिससे हमारे पशुओं में संक्रमण फैलने का अंदेशा बना हुआ है

प्रशासन के आदेश रद्दी की टोकरी में…

जिले के स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए सख्त नियम बना रखे हैं। स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी स्थिति में मेडिकल कचरा खुले में नहीं फेंका जाएगा। बावजूद इसके, प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए ये निजी चिकित्सक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर अनजान बने हुए हैं या फिर उनकी मिलीभगत से यह खेल चल रहा है?

जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल

करवड़ में हो रही इस लापरवाही से कभी भी कोई गंभीर बीमारी या महामारी फैल सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द इन अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई करे और खुले में कचरा फेंकने वालों पर सख्त जुर्माना लगाए।

ग्राम में इन झोलाछाप डॉक्टरों को दुकानें संचालित करते-करते काफी समय हो गया है फिर भी अभी तक मेडिकल एवं प्रशासन की टीम ने इन झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई बड़ी कार्यवाही नहीं की है

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