हर्षोल्लास के साथ समाजजनों ने मनाया गुरुसप्तमी का महापर्व, शोभायात्रा में भक्तिधुन पर थिरकते रहे युवा..!

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मेघनगर@मुकेश सोलंकी
कलिकाल सर्वज्ञ, विश्व पूज्य दादा गुरुदेव प्रभु श्रीमद विजय राजेन्द्र सुरीश्वरजी महाराजा के 199वे जन्म एवं 119वे स्वर्गारोहण दिवस गुरुसप्तमी महोत्सव के पावन अवसर पर स्थानीय श्री त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ, श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर ट्रस्ट एवं परिषद परिवार द्वारा नगर में आयोजित प्रथम सामूहिक गुरुसप्तमी महोत्सव में प्रातः दादा गुरुदेव के पक्षाल का लाभ श्रीमती स्नेहलतादेवी मनोहरलालजी कावड़िया परिवार ने, दादा गुरुदेव की प्रथम केशर पूजा का लाभ श्री शांतिलालजी राकेशजी लोढ़ा परिवार ने लिया।

सकल श्रीसंघ की नवकारसी का लाभ सामूहिक गुरुसप्तमी महोत्सव लाभार्थी परिवार ने लिया। प्रातः 10 बजे श्री ज्ञान मंदिर से वरघोड़ा प्रारम्भ हुआ, पूरे वरघोड़े में समाज के युवा, एवं मातृशक्ति प्रभु भक्ति गीत पर थिरकते रहे। वरघोड़ा साईं चौराहा, दशहरा मैदान, शिवाजी चौक होता हुआ श्री शान्ति सुमतिनाथ जिनालय पहुंचा जहां परमात्मा की आरती का लाभ राजेन्द्रजी, प्रमोदजी लूणावत परिवार, मंगलदीपक का लाभ श्रीमती कैलाशबेन राजमलजी चंडालिया परिवार ने लिया।
पुनः वरघोड़ा प्रारम्भ होकर आजाद चौक, गौडी पार्श्वनाथ मंदिर होता हुआ, ज्ञान मंदिर पहुंचा जहां सजोड़े वर्षीतप के तपस्वी रजत कावड़िया, रचिता कावड़िया, श्रीमती विभा रांका, गुरुसप्तमी महोत्सव के सामूहिक लाभार्थी परिवार, सातम ग्रुप सूरत, सातम ग्रुप मुंबई, पुष्पादेवी नेमीचंदजी जैन भायंदर, शा राजेंद्रजी बाबूलालजी सौभागमलजी लाम्ब गौत्र चौहान परिवार मुंबई, श्रीमती कैलाशबेन राजमलजी चंडालिया परिवार मेघनगर, श्रीमती स्नेहलतादेवी मनोहरलालजी कावड़िया परिवार मेघनगर का श्रीसंघ, ट्रस्ट एवं परिषद परिवार द्वारा बहुमान किया गया। साथ ही आज के स्वामीवात्सलय के लाभार्थी परिवार मधुकर इवेंट्स, शांतिलालजी सुशीलाजी लोढ़ा एवं दिलीपजी विमलाजी कोठारी परिवार का बहुमान किया गया । प्रातः दादा गुरुदेव की आरती का लाभ सकल श्रीसंघ अध्यक्ष सुरेशचंद्रजी पूरणमलजी जैन परिवार ने एवं पुण्य सम्राट की आरती लाभ मधुकर इवेंट्स लोढ़ा – कोठारी परिवार द्वारा लिया गया।
दोपहर में श्रीमद राजेन्द्रसूरी अष्टप्रकारी पूजन दिलीपजी सागरमलजी कोठारी परिवार द्वारा पढ़ाई गई। जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। आज दादा गुरुदेव की आकर्षक अंगरचना की गई जिसका दर्शन लाभ सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया।





