झाबुआ

अंतिम यात्रा भी बनी जोखिम भरी,,,झाबुआ के चरेल गांव में गले तक पानी में उतरकर ले जानी पड़ी अर्थी,,,वीडियो वायरल,,,विकास की पोल खुली..!

#Jhabuahulchul 

झाबुआ से विशेष रिपोर्ट : आयुष पाटीदार/मुकेश सोलंकी ✍🏻

जिले की ग्राम पंचायत चरेल (तहसील मेघनगर) से एक दर्दनाक और शर्मसार कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में ग्रामीण अपने परिजन के शव को अंतिम संस्कार के लिए गले तक पानी में उतरकर ले जाते दिख रहे हैं। बारिश के कारण रास्ते में नाले में इतना पानी भर गया कि श्मशान तक जाने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा, लेकिन मजबूरी में परिजनों को जान जोखिम में डालकर अर्थी कंधे पर उठाकर नाले को पार करना पड़ा।

इस दृश्य ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है आंखों में दर्द, दिल में मजबूरी और कंधों पर अर्थी… यह तस्वीर विकास के उन दावों पर करारा तमाचा है जो आज़ादी के अमृतकाल में भी केवल कागज़ों तक सीमित हैं।

 

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता या पुल नहीं है। कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, पर अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले। नतीजतन, हर बरसात में ग्रामीणों को अपने परिजनों की अंतिम यात्रा ऐसे ही खतरनाक रास्तों से ले जानी पड़ती है।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। लोग पूछ रहे हैं क्या यही है विकास का मॉडल..? क्या मरने के बाद भी चैन नहीं मिलेगा..? सरकार कब जागेगी..?

झाबुआ जैसे आदिवासी अंचल में यह कोई पहला मामला नहीं है। जिले के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी सड़क, पुल और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। लेकिन इस वीडियो ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि “विकास की बातें भले आसमान छू लें, पर जमीनी सच्चाई अब भी पानी में डूबी हुई है।

चरेल गांव का यह दृश्य सिर्फ एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है — क्या यही है अमृतकाल का भारत…?

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