सारंगी

ॐ आकार की पहाड़ियों के बीच शिवकुंड धाम: जहां प्रकृति करती है भोलेनाथ का अभिषेक,,,24 घंटे होता है प्राकृतिक जलाभिषेक, शिवकुंड धाम में उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु…!

कैबिनेट मंत्री निर्मला भूरिया के प्रयासों से हरियाली से निखरा शिवकुंड धाम, श्रद्धालुओं की आस्था में बढ़ोतरी

अद्वितीय शिवकुंड धाम – जहां आस्था, प्रकृति और विकास का मेल देता है दिव्य दर्शन

#Jhabuahulchul 

सारंगी@संजय उपाध्याय

पेटलावद की पावन धरती पर, जहां हर ओर प्रकृति अपनी अनुपम छटा बिखेर रही है, वहीं बेकल्दा गांव के पास पहाड़ियों की गोद में छिपा हुआ है एक ऐसा धाम, जो अद्भुत और अलौकिक रहस्यों को संजोए हुए है। यहां पहाड़ियों का आकार स्वयं ॐ (ओम्) का स्वरूप लिए दिखाई देता है, और इसी दिव्य संरचना के केंद्र में विराजते हैं भगवान भोलेनाथ। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने स्वयं ॐ लिखकर इस धरा को शिवमय कर दिया हो। श्रद्धालु कहते हैं कि यहां पहुंचने पर हर श्वास में शिव और हर धड़कन में ऊँ का कंपन सुनाई देता है।

दिव्यता से भरा चेनपुरी शिवकुंड:

सारंगी नगर से 15 किलोमीटर एवं बेकल्दा गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित यह स्थान चेनपुरी शिवकुंड के नाम से प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने के बाद ऐसा लगता है मानो किसी दूसरी ही दुनिया में कदम रख दिया हो। शांत वातावरण, गूंजती पवन और हर ओर फैली हरियाली — सब मिलकर इस धाम को अद्वितीय बना देते हैं। यहां भगवान भोलेनाथ का मंदिर ठीक उसी बिन्दु पर स्थित है, जहां प्रकृति ने ऊँ अक्षर का आकार रचा है।

12 महीने जल से भरा कुंड: और 24 घंटे प्राकृतिक अभिषेक:

मंदिर में सेवा दे रहे ब्रह्मचारी मोहन डामर बताते हैं कि यहां की सबसे पवित्र विशेषता यह है कि कुंड में पूरे बारह महीने जल भरा रहता है। यह कुंड वर्षों पुराना है, और इसकी पवित्रता आज भी वैसी ही बनी हुई है। सबसे अद्भुत बात यह है कि यहां भगवान शिवजी का प्राकृतिक जलाभिषेक चौबीसों घंटे होता है। यह दिव्य दृश्य श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर देता है। भक्त यहां आकर विशेष रूप से कुंड का जल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

बाल हनुमान और प्राचीन मान्यता:

मंदिर प्रांगण में बाल हनुमान की प्रतिमा भी विद्यमान है, जो इस स्थान की पवित्रता को और भी बढ़ा देती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस कुंड में स्नान करने से मनुष्य की थकान व मानसिक अशांति समाप्त हो जाती है और आत्मा को गहन शांति का अनुभव होता है। मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ यहां भक्तों की हर पुकार सुनते हैं और सच्ची श्रद्धा से बुलाने वाले की मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।

अद्भुत दृश्य सावन मास में:

स्थानीय श्रद्धालु बताते हैं कि सावन मास में शिवकुंड धाम का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। चारों ओर छाई हरियाली, वातावरण में गूंजते बम-बम भोले के जयघोष और शिवभक्तों का सैलाब यहां एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। कठिन राहों से होते हुए जब श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं तो उनकी भक्ति और आस्था और भी प्रबल हो जाती है। मान्यता है कि सावन में यहां जल चढ़ाने वाले भक्तों की हर मनोकामना भोलेनाथ अवश्य पूर्ण करते हैं।

मंत्री निर्मला भूरिया का योगदान:

इस धाम के संरक्षण और सौंदर्यीकरण में वर्तमान विधायक एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके प्रयासों से यहां पौधारोपण अभियान चलाया गया, जिससे पहाड़ियां और भी अधिक हरियाली से आच्छादित हो गई हैं। साथ ही रास्तों व धाम क्षेत्र में कई विकास कार्य कराए गए, ताकि श्रद्धालुओं को यहां आने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। स्थानीय लोग बताते हैं कि मंत्री भूरिया के निर्देशन में हुए इन प्रयासों ने इस धाम की सुंदरता और आकर्षण को कई गुना बढ़ा दिया है।

भगवान शिव और प्रकृति का मिलन:

शिवकुंड धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह वह स्थान है जहां परमात्मा और प्रकृति का अद्भुत संगम होता है। यहां आने वाले श्रद्धालु अनुभव करते हैं कि यह स्थान वास्तव में किसी दिव्य लोक से कम नहीं। पहाड़ियों में गूंजता ऊँ का स्वरूप, प्राकृतिक सौंदर्य और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद — इन सबका मिलन ही इस धाम को अनोखा और अद्वितीय बनाता है।

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