बारिश के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में टोने-टोटके, रायपुरिया में दूल्हे को गधे पर उल्टा बैठाकर गांव के सभी मुक्तिधाम पर पहुंचे कर परिक्रमा कराईं गई….

रायपुरिया@राजेश राठौड़
मंगलवार को गांव में उज्जैनी रखी गई थी बारिश का दौर लंबा खिंचने से किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। खेतों में खड़ी फसलों पर संकट मंडरा रहा है और कई क्षेत्रों में फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में अब बारिश के लिए पारंपरिक मान्यताओं और टोने-टोटकों का सहारा लिया जा रहा है।
रायपुरिया में भी ग्रामीणों ने बारिश के लिए वर्षों पुरानी परंपरा के तहत उज्जैनी मनाई। इसके अंतर्गत एक व्यक्ति को दूल्हे की तरह सजाया गया और उसके गले में जूतों की माला पहनाकर उसे गधे पर उल्टा बैठाया गया। इसके बाद ग्रामीणों और बारातियों के साथ उसे पूरे गांव में घुमाया गया। इस दौरान महिलाएं अपनी स्थानीय भाषा में पारंपरिक गीत गाते हुए साथ चल रही थीं। ग्रामीणों ने गांव के सभी मुक्तिधामों पर भी इस जुलूस को घुमाया।
ग्रामीणों की मान्यता है कि जब बारिश का दौर लंबा खिंच जाता है और इंद्रदेव रूठ जाते हैं, तब इस प्रकार की परंपरा निभाने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में बारिश होती है। ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और जब भी बारिश में लंबा अंतराल आता है, तब गांव में उज्जैनी मनाई जाती है। आमतौर पर दोपहर बाद इस पारंपरिक आयोजन को किया जाता है।
तलावपाड़ा निवासी नीलेश भूरिया ने बताया कि यह परंपरा गांव में लंबे समय से चली आ रही है। जब बारिश में लंबी खेंच आती है, तब ग्रामीण मिलकर उज्जैनी का आयोजन करते हैं। इसी मान्यता के तहत इस बार भी ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उज्जैनी मनाई और अच्छी बारिश की कामना की।
इसी तरह पेटलावद नगर में भी बारिश के लिए एक जीवित व्यक्ति की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली गई। ग्रामीण क्षेत्रों में किए जा रहे इन पारंपरिक आयोजनों के पीछे ग्रामीणों की आस्था और मान्यता जुड़ी हुई है।
हालांकि, इन आयोजनों के बीच किसानों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं और सभी को अच्छी बारिश का इंतजार है।




