बारिश रुकी तो फिर याद आई उज्जैनी… क्या सदियों पुरानी यह परंपरा केवल संकट के समय ही याद की जाएगी..?…चौराहा पर एक ही चर्चा…उज्जैनी’ कब होगी..?

खवासा@आयुष पाटीदार/आनंदीलाल सिसोदिया
कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। लंबी खींचतान के बाद आज हल्की बारिश जरूर हुई है, लेकिन खेती के लिए अभी भी लगातार और अच्छी वर्षा की आवश्यकता है। ऐसे समय में खवासा नगर में एक बार फिर सदियों पुरानी परंपरा उज्जैनी की चर्चा शुरू हो गई है।
वर्षों से यह मान्यता रही है कि जब लंबे समय तक वर्षा नहीं होती, तब गांव के लोग एकजुट होकर भगवान इंद्रदेव से अच्छी बारिश की प्रार्थना करते हैं। यह केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, सामाजिक एकता और अन्नदाता किसानों के प्रति संवेदना का प्रतीक भी माना जाता है।
लेकिन समय के साथ यह परंपरा धीरे-धीरे सिमटती चली गई। आज उज्जैनी पहले जैसी नहीं मनाई जाती। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हमारी सदियों पुरानी परंपराएं केवल तब ही याद आएंगी, जब संकट सामने खड़ा होगा..? यदि यह हमारी संस्कृति और पहचान का हिस्सा है, तो इसे आने वाली पीढ़ियों तक भी जीवित रखने का प्रयास होना चाहिए।
किसान अपनी सालभर की मेहनत, पूंजी और उम्मीदें खेतों में बोता है। उसकी एक फसल से पूरे परिवार का भविष्य जुड़ा होता है। ऐसे में भगवान इंद्रदेव से अच्छी वर्षा की प्रार्थना केवल किसानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज की खुशहाली के लिए होती है। इसलिए जरूरत है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करें, पुरानी परंपराओं को संजोएं और अन्नदाता की खुशहाली के लिए एकजुट होकर प्रार्थना करें। यही उज्जैनी का वास्तविक संदेश है।
वहीं बाज़ार के हर चौराहे पर अब एक ही चर्चा है कि क्या खवासा में भी उज्जैनी मनाई जाएगी…?



