नेताओं की गोद छोड़ समाज की गोद में बैठे पत्रकार : शलभ भदौरिया,,,उज्जैन में सफलता पूर्वक आयोजित हुआ जिला सम्मेलन…

उज्जैन डेस्क। मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ का एक दिवसीय जिला सम्मेलन बुधवार को उज्जैन के एक निजी होटल में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन संघ के प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया की विशेष उपस्थिति में आयोजित किया गया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर शैलेषानंद जी महाराज, प्रवचनकर्ता शांतु गुरु, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष रविंद्र सोलंकी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बड़े भाई एवं प्रेस क्लब अध्यक्ष नंदलाल यादव मंच पर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संचालन वरिष्ठ पत्रकार मुस्कराके ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत में जिलाध्यक्ष डॉ. राहुल कटारिया ने सभी अतिथियों का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया और स्वागत उद्बोधन दिया। मंच पर महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश सह संयोजक प्रगति श्रीवास्तव, प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र राठौड़, प्रदेश मंत्री डॉ. नरेंद्र राजावत, पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र पुरोहित, संभागीय अध्यक्ष मनोज जैन, जिला महासचिव डॉ. घनश्याम शर्मा और छतरपुर संभाग के जिला महामंत्री प्रतीक खरे विशेष रूप से मौजूद थे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया ने पत्रकारिता की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को राजनेताओं और अधिकारियों की गोद में बैठना बंद कर समाज की गोद में बैठना चाहिए। पत्रकार का काम सत्ता की चापलूसी करना नहीं, बल्कि जनता की आवाज बनना है।
भदौरिया ने कहा कि हम पत्रकारों को सुरखाब के पर नहीं लगे हैं और न ही हम कहीं से लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। यह सब मन को समझाने की बातें हैं। असलियत में पत्रकार की पहचान उसके काम से होती है, पदवी से नहीं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि आज पत्रकार बलात्कार जैसी संवेदनशील खबरों में भी रंग भरकर सनसनी बनाने से बाज नहीं आते। ऐसी खबरों से बचना चाहिए और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रकाशन नहीं करना चाहिए। इससे समाज में गलत संदेश जाता है।
उन्होंने पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा कि नारद जी हमारे पूर्वज हैं और हमें भी नारद बनकर ही पत्रकारिता करनी चाहिए। नारद जी की विशेषता थी कि वे देवताओं के हितैषी होते हुए भी राक्षसों के बीच सम्मान पाते थे। इसका मतलब है कि पत्रकार को निष्पक्ष होना चाहिए। न किसी का पक्ष लेना है और न विपक्ष बनना है। सिर्फ सच के साथ खड़ा होना है।
भदौरिया ने एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि जब पूरे देश में जातिवाद चल रहा है तो हम पत्रकार पत्रकारितावाद क्यों नहीं कर सकते। पत्रकार सिर्फ पत्रकार होता है। वह किसी भी संगठन, जिले या विचारधारा का हो, अगर वह परेशानी में है तो हमें उसकी मदद करनी चाहिए। संगठन का मतलब ही एक दूसरे के सुख दुख में साथ खड़ा होना है।
महामंडलेश्वर शैलेषानंद जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि सनसनीखेज पत्रकारिता धिक्कार के काबिल है। आज कल नकली पत्रकारिता का आवरण ओढ़कर कुछ लोग पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं। सही को सही लिखने की कला सीखनी चाहिए। उन्होंने श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा 1 मई को मजदूर दिवस पर किए गए कार्यक्रम की मुक्त कंठ से सराहना की। महाराज ने कहा कि आज पत्रकारिता कालवलि की जेल में कैद नजर आती है। ऐसे में पत्रकारों का दायित्व है कि केवल ड्राफ्टिंग का उपयोग करने से बचें और जमीनी सच्चाई लिखें।
प्रवचनकर्ता शांतु गुरु जी ने कहा कि पत्रकार समाज का दर्पण होता है और दर्पण कभी झूठ नहीं दिखाता। पत्रकारों को न किसी के प्रभाव में आकर लिखना चाहिए और न ही किसी के दबाव में। कलम स्वतंत्र होनी चाहिए।
पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र पुरोहित ने संगठन की रीति नीति और अब तक किए गए कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जिला सम्मेलनों की उपयोगिता को प्रतिपादित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से जमीनी स्तर के पत्रकारों की समस्याएं सामने आती हैं।
कार्यक्रम को प्रेस क्लब अध्यक्ष नंदलाल यादव और उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रविंद्र सोलंकी ने भी संबोधित किया। दोनों ने पत्रकारों के हितों के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
श्रमजीवी के पदाधिकारी भी मौजूद रहे, शहर,अध्यक्ष सुमेर सिंह सोलंकी, सचिव आनंद पांचाल, जिला सचिव घनश्याम शर्मा, विजय ठाकुर ,अमर शंकर जोशी धारा खान, मनोज भटनागर, लखन ठाकुर, नितेश शर्मा, महिदपुर से, अर्जुन ठाकुर अरुण जी आदि पत्रकार साथी ग्रामीण,से बड़नगर ,घटिया झारडा, , से सैकड़ो पत्रकार सम्मेलन में सम्मिलित हुए।
सम्मेलन के दौरान संगठनात्मक घोषणाएं भी की गईं। झारडा ब्लॉक अध्यक्ष के पद पर मांगीलाल कुमावत और बड़नगर ब्लॉक अध्यक्ष के पद पर राजकुमार नाहर के नाम की घोषणा की गई। दोनों नव नियुक्त पदाधिकारियों का मंच से स्वागत किया गया। आभार डॉ गोविंद सोलंकी ने माना,




