रायपुरिया में गूँजा जय श्रीराम: बिना लोहे के बना डेढ़ करोड़ का भव्य संगमरमर मंदिर, विधि-विधान से हुई देव प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा…

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रायपुरिया@राजेश राठौड़
रायपुरिया में पाटीदार समाज द्वारा नवनिर्मित श्री राम मंदिर में गुरुवार को शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीराम-जानकी परिवार, जगत जननी मां भगवती भवानी और श्रीराधेकृष्ण की प्रतिमाओं का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूरी भव्यता और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर समूचा क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया और भगवान के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
इस नवनिर्मित मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण शैली है। लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह भव्य मंदिर पूरी तरह सफेद संगमरमर के पत्थरों से निर्मित है, जिसमें आधुनिक निर्माण सामग्री के विपरीत लोहे की एक भी कील का उपयोग नहीं किया गया है। मंदिर के कपाट शुद्ध चांदी से बनाए गए हैं, जो इसकी दिव्यता को और बढ़ा रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत एक सप्ताह पूर्व भव्य कलश शोभा यात्रा के साथ हुई थी, जिसमें स्थानीय महिलाओं और कन्याओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था। गुरुवार को मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा-अर्चना के साथ प्रतिष्ठा की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया।
डॉ शास्त्री ने अनुष्ठान सम्पन्न कराए
प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अंतिम दिन श्रीकृष्ण कामधेनु गौशाला के पीठाधीश्वर आचार्य देवेंद्र शास्त्री (धरियाखेड़ी, मंदसौर) ने धार्मिक अनुष्ठानों का संपादन किया। श्री शास्त्री ने विशेष हवन और यज्ञ के उपरांत प्रतिमाओं को गर्भगृह में स्थापित करवाया। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण ‘नेत्रोन्मीलन’ (प्रतिमा की आंखें खोलना) का अनुष्ठान मंत्रोपचार के साथ संपन्न हुआ। इससे पूर्व देवी-देवताओं का पवित्र जल, गंध और सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक कर उन्हें नवीन वस्त्र धारण कराए गए। आचार्य श्री ने इस अवसर पर कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात मूर्ति केवल पत्थर की प्रतिमा न रहकर साक्षात ईश्वर का रूप धारण कर लेती है।
सराहनीय सहयोग रहा
इस सात दिवसीय आयोजन को सफल बनाने में पाटीदार समाज समिति रायपुरिया और मंदिर निर्माण समिति के साथ-साथ समस्त ग्रामीणों और अन्य समाजों का भी सराहनीय सहयोग रहा। सेवा भाव का यह आलम था कि हर वर्ग के लोग इस धार्मिक यज्ञ में अपनी आहुति देने को तत्पर दिखे। कार्यक्रम के दौरान पेटलावद एसडीओपी अनुरवित सबनानी और पीपलखूटा के महंत दयाराम दास महाराज ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रतिष्ठा के उपरांत भव्य महाआरती हुई और विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
इनको मिला लाभ
समारोह के अंतिम दिन विभिन्न धर्मप्रेमियों ने पुण्य लाभ अर्जित किया। मां अंबाजी की पोशाक का लाभ उकरलाल अंबाराम पाटीदार ने, श्रीराम जानकी परिवार की पोशाक का लाभ अमृतलाल गंगाराम रचपुतिया ने और राधेकृष्ण की पोशाक का लाभ सुश्री पूजा मोहनलाल पाटीदार ने लिया। इसी प्रकार 56 भोग के लाभार्थी लालू अंबाराम पाटीदार रहे, जबकि इत्र अर्पण का सौभाग्य पुरुषोत्तम भेरूलाल पाटीदार को मिला। पुष्प मालाओं का लाभ दयाराम रणछोड़ पाटीदार, किशोर कांजी पाटीदार और रामलाल रमेश चंद पाटीदार ने प्राप्त किया। प्रथम महाआरती के लाभार्थी शैलेंद्र रामलाल पाटीदार, नरोत्तम रामलाल पाटीदार और श्याम ढुंगाजी पाटीदार रहे। मंदिर में चवर डुलाने का सौभाग्य लक्ष्मीनारायण छोगालाल पाटीदार और भरतलाल भागीरथ पाटीदार को मिला, वहीं नगर भ्रमण के दौरान रतनलाल शिवराम पाटीदार ने यह सेवा दी। घुड़सवार प्रथम और द्वितीय का लाभ क्रमशः रमेशचंद अंबाराम पाटीदार एवं सत्यम जगदीश पाटीदार ने प्राप्त किया।




