12 साल का संघर्ष, अटूट हौसला और बड़ी जीत: केशरपुरा के बाबूलाल वसुनिया बने MPPSC खनिज निरीक्षक…

झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के ग्राम केशरपुरा के निवासी श्री बाबूलाल वसुनिया पिता श्री जीवना वसुनिया अंततः मध्य प्रदेश लोक सेवा से खनिज निरीक्षक के पद पर चयनित होने पर बहुत बहुत बधाई ।श्री बाबूलाल वसुनिया की प्रारंभिक शिक्षा गृह गांव में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय केशरपुरा में हुई,इसके बाद कक्षा 6 से 12 वीं तक की शिक्षा प्रसिद्ध समाज सेवी मामा बालेश्वर दयाल की कर्मभूमि बामनिया से प्राप्त कर , उच्च शिक्षा शहीद चंद्रशेखर आजाद शासकीय महाविद्यालय झाबुआ से विज्ञान संकाय से स्नातक की उपाधि हासिल की। स्नातक के बाद श्री वसुनिया ने अधिकारी बनने की ठान ली।तब से लगातार MPPSC की तैयारी में जुट गए। इस दौरान जीवन में अनेकों बार उतार चढ़ाव आए,इनके माता पिता की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होने से हर कदम आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा किंतु बाबूलाल ने अपने उद्देश्य के साथ समझौता कभी नहीं किया अपितु लगातार बिना थके संघर्ष करते गए ,लंबे समय बाद मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग2026 में आयोजित खनिज निरीक्षक परीक्षा में चयनित होकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों युवाओं के प्रेरणास्रोत बने।श्री बाबूलाल वसुनिया ने 2014 से 2026 तक 2021 MPPSC मुख्य परीक्षा में सम्मिलित हुए किंतु असफल हुए।फिर भी हार नहीं मानी बस मन में एक ही उद्देश्य था कि MPPSC से चयनित होकर लोक सेवा में जाना ओर आज अपनी मंजिल को पा कर अपना उद्देश्य को हासिल कर ही लिया।फर्श से अर्श तक के इस संघर्ष भरे सफर में माता पिता श्री जीवना वसुनिया माता श्रीमती सुगना वसुनिया , ससुर श्री .वरसिंह भूरियाएवं सास श्रीमती निर्मला भूरिया मार्गदर्शक श्री कैलाश चंद्र वसुनिया ,नारी शक्ति श्रीमती संतोष वसुनिया , अंकल श्री राजमल जी गामड़ , श्री संतोष डिंडोर ,बड़े भाई श्री गजेंद्र वसुनिया ,श्री दिलीप जी वसुनिया , मुकेश भाभर ,कांतिलाल खराड़ी ,अजय सिंगाड , पूर्व जनपद सीईओ श्री लक्ष्मण सिंह डिंडोर ,सहायक आयुक्त श्री पवन जी मईडा ,जिला परिवहन अधिकारी श्री नंदलाल गामड़ , इंजीनियर श्री बालूसिंह गामड़ ,एकलव्य निशुल्क कोचिंग के संचालक श्री प्रीतम सिंह मुनिया ,टी. आई. श्री प्रह्लादसिंह डिंडोर अधिकारीगण ,सह पाठी गण ,मित्रगणों , हॉस्टल वार्डन ,परिवारजनों ,इंदौर के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में संलग्न मित्रगणों का अविस्मरणीय योगदान रहा ।





