मेघनगर में ‘सफेद ज़हर’ का खतरा: फॉस्फो-जिप्सम बना पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए संकट…

#Jhabuahulchul
मेघनगर@मुकेश सोलंकी
मेघनगर में बढ़ रहे खतरनाक औद्योगिकीकरण के बीच उर्वरक (Fertilizer) संयंत्रों से निकलने वाला उप-उत्पाद ‘फॉस्फो-जिप्सम’ अब पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। विशेष रूप से फास्फेटिक उर्वरक उद्योगों के पास जमा हो रहे इसके विशाल पहाड़ न केवल ज़मीन को बंजर बना रहे हैं, बल्कि भूजल को भी ज़हरीला कर रहे हैं।
खाद निर्माण की प्रकिया के दौरान उद्योगों से निकलने वाले इस फास्फो- जिप्सम में कैडमियम, सीसा , फ्लोराइड और यूरेनियम जैसे भारी तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व मिट्टी में मिलकर उसकी उर्वरता को समाप्त कर देते हैं और फसलों के जरिए मानव शरीर में पहुँचकर कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन रहे हैं।
हवा के साथ उड़कर फेफड़ों में गहराई तक पहुंचता है जिप्सम……
खुले में रखे जिप्सम के पहाड़ रूपी ढेर सूखने पर महीन धूल बनकर हवा में उड़ते हैं। यह धूल सांस के जरिए फेफड़ों में गहराई तक जा सकती है, जिससे अस्थमा, सूजन और श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं इसके साथ ही जल प्रदूषण के रूप में भी इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते है क्योंकि बारिश के दौरान इन ढेरों से होने वाला रिसाव क्षेत्र की नदियों और भूजल स्तर को प्रदूषित करता है।
विशेषज्ञों का मत —
वैज्ञानिकों के अनुसार फास्फो – जिप्सम मे मौजूद खतरनाक तत्वों का सही प्रबंधन ना होना मानव स्वास्थ्य के लिए संकट पैदा कर सकता है विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो हवा के साथ में उड़ते हुए इस धूल रूपी खतरनाक अपशिष्ट के संपर्क लगातार में रहते हैं ।
क्या हो सकता है समाधान ——
खाद फैक्ट्री से निकलने वाले इस अवशिष्ट पदार्थ का उपयोग कई सीमेंट कारखाने उनके उत्पाद में कर रहे है यदि सुरक्षित तरीके से उन सीमेंट कारखानों तक माल को पहुंचाया जाए तो समस्या से कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सकता है । मेघनगर के सबसे बड़े खाद उत्पादक कृष्णा फॉस्केम लिमिटेड द्वारा यह किया जा रहा है किंतु परिवहन ठेकेदार द्वारा माल को खुले में ले जाकर नागरिकों के स्वास्थ्य, प्रशासन एवं पॉल्यूशन बोर्ड को भी खुली को चुनौती दी जा रही है।नियम अनुसार तो कारखानों से निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थों का निपटारा आधुनिक उपकरणों के माध्यम से कारखाना क्षेत्र में ही होना चाहिए यदि पॉल्यूशन बोर्ड सख्ती दिखाएं तो कारखाना संचालकों एवं परिवहन ठेकेदार द्वारा इस अवशिष्ट जिप्सम के खुले रुप में परिवहन पर प्रतिबंध लगा सकती है, साथ ही ठेकेदार पर भी नियम अनुसार भारी जुर्माना किया जा सकता है।
प्रदूषण बोर्ड का रवैया …..
पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को देखते हुए प्रदूषण बोर्ड से अपेक्षा करना व्यर्थ है , क्योंकि मेघनगर में हो रहे प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों की आंखों और उनके विभिन्न उपकरणों पर हुआ है क्योंकि ना तो उनकी आंखों को मेघनगर का प्रदूषण दिखाई देता है और ना ही उनके उपकरण यहां के जल को प्रदूषण बताते हैं ।
यदि समय रहते औद्योगिक कचरे के निपटान के लिए सख्त नीति और आधुनिक तकनीक नहीं अपनाई गई, तो यह ‘सफेद प्रदूषण’क्षेत्र के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट बन जाएगा।




