सारंगी

कर्म का सिद्धांत अत्यंत कठोर है। जहां अच्छे कर्म व्यक्ति के जीवन को प्रगति की दिशा में ले जाते हैं, वहीं बुरे कर्म उसे पतन की ओर ले जाते हैं,,,पंडित केशव चतुर्वेदी।

सारंगी@संजय उपाध्याय

मनुष्य को किए हुए शुभ या अशुभ कर्मो का फल अवश्य भोगना पड़ता है : पंडित केशव चतुर्वेदी। ग्राम बरवेट मैं चल रही श्रीमद् भागवत कथा में पंडित केशव चतुर्वेदी ने भक्तों को बताया कर्म का सिद्धांत अत्यंत कठोर है। जहां अच्छे कर्म व्यक्ति के जीवन को प्रगति की दिशा में ले जाते हैं, वहीं बुरे कर्म उसे गर्त की ओर ले जाते हैं। यह बात सारंगी रोड बरवेट में चल रही सप्तदिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन कही।

उन्होंने कहा कि मनुष्य के द्वारा किए हुए शुभ या अशुभ कर्मो का फल अवश्य भोगना पड़ता है। कथा व्यास ने वामन अवतार प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि जो जैसा कर्म करता है, उसे वैसा ही फल भुगतना पड़ता है। राजा बलि जब वामन भगवान को तीन पैर जमीन दान देने का शुभ कार्य कर रहे थे, तब कुलगुरु शुक्राचार्य इस शुभ कार्य में रोड़ा बन रहे थे। वो भवरा बनकर कमंडल की टोंडी में बैठ गए थे। तब राजा बलि ने घास के तिनके को टोंडी में डाला तो कुलगुरू शुक्राचार्य की आंख फूट गई। ये उनके अशुभ कर्मों का फल उनको मिला था। इसीलिए अगर कही धार्मिक या शुभ कार्य हो रहे है तो उसमे रोड़ा नही बने। वरना उसका फल आपको भुकतना पड सकता है। कथा व्यास ने कहा कि यह नितांत आवश्यक है कि हम अपने कर्र्मो का लेखा-जोखा करें। हमारा अगला जन्म किस प्राणी के रूप में होगा, यह सब कुछ हमारे कर्मो पर ही निर्भर करता है।

अनेक जन्मों में किए हुए कर्म हमारे अंत:करण में संग्रहीत रहते हैं। वे संचित कर्म कहलाते हैं और उनसे ही प्रारब्ध बनता है। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कर्म को प्रधानता देते हुए यहां तक स्पष्ट किया है कि व्यक्ति की यात्रा जहां से छूटती है, अगले जन्म में वह वहीं से प्रारंभ होती है। जो प्रकृति के नियमों का पालन करता है। वह परमात्मा के करीब है, लेकिन ध्यान रहे यदि परमात्मा भी मनुष्य के रूप में अवतरित होता है तो वह उन सारे नियमों का पालन करता है जो सामान्य मनुष्यों के लिए हैं। लौकिक और पारमार्थिक कर्मो के द्वारा उस परमात्मा का पूजन तो करना चाहिए, पर उन किए हुए कर्मो और संसाधनों के प्रति अपनी आसक्ति न बढ़ाएं।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया

भागवत कथा के चतुर्थ दिवस में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रीकृष्ण का जन्म होते ही भक्त जमकर झूमे। पंडित श्री त्रिवेदी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में अच्छे व बुरे दिन प्रभु की कृपा से ही आते हैं। कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, जेल के ताले टूट गये। पहरेदार सो गये। वासुदेव व देवकी बंधन मुक्त हो गए। यह सब प्रभु की कृपा से ही संभव है। कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते हैं। भगवान का जन्म होने के बाद वासुदेव ने भरी जमुना पार करके उन्हें गोकुल पहुंचा दिया । वहां से वह यशोदा के यहां पैदा हुई शक्तिरूपा बेटी को लेकर चले आये। कृष्ण जन्मोत्सव पर नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की ओर ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमो के जय कारो के साथ गीत पर भक्त जमकर झूमे। इस अवसर पर पन्नालाल पाटीदार अनंतखेडी, वासुदेव पाटीदार रायपुरिया, गोरधनलाल पाटीदार गंगाखेड़ी, मांगीलाल पांचाल, बालमुकुंद पाटीदार कुवाझगर, कृष्णा पाटीदार बिरमावल, वासुदेव पाटीदार रायपुरिया, कैलाश ओटलावाल, जगदीश पटेल, श्रीमती विनुबाला पाटीदार जीराबाद उपसरपंच माया पाटीदार, बाबूलाल जी मेड़ा डाक्टर संतोष पाटीदार बरवेट, मणिशंकर रावल, कालूराम पाटीदार कोदली, शंभुलाल पाटीदार कूआझागर, नंदकिशोर जी पाटीदार सारंगी सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण करने पहुंच रहे है।

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