झाबुआ की बेटियों ने खेलों में रचा इतिहास, सुनीता सुशील वाजपेई के मार्गदर्शन में लगातार जीत रही मेडल…

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झाबुआ@आयुष पाटीदार
मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले में बेटियों की खेल प्रतिभा को निखारने और उन्हें आगे बढ़ाने में सुनीता सुशील वाजपेई का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है। स्वर्गीय सुशील वाजपेई पहलवान की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनकी पत्नी सुनीता वाजपेई आज भी बेटियों के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
झाबुआ में चल रही जय बजरंग व्यायामशाला में बालिकाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और हर संभव सहयोग दिया जा रहा है। इसी मेहनत और समर्पण का परिणाम है कि जिले की बेटियाँ लगातार राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं।
27 अप्रैल 2025 को मध्यप्रदेश पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में झाबुआ की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार गोल्ड मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया। इसके साथ ही संभाग स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में प्रियांशी गुड़िया ने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
खेलों में झाबुआ की बेटियों की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 13 अक्टूबर को पांच बालिकाओं का चयन राष्ट्रीय स्टैंड लिफ्टिंग प्रतियोगिता (सिक्किम) के लिए हुआ, जिससे पूरे जिले को गर्व महसूस हुआ।

इसके बाद 14 दिसंबर को भोपाल में आयोजित खेलो इंडिया वूमेन प्रतियोगिता में झाबुआ जिले की दो प्रतिभाशाली बेटियों नानूडी चारेल और प्रियांशी गुड़िया ने शानदार प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया।
वहीं सांसद ट्रॉफी महिला 2026 में भी जय बजरंग व्यायामशाला की बेटियाँ विजेता बनीं और अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
28 जनवरी को आयोजित खेलो एमपी यूथ गेम्स में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता के दौरान झाबुआ की तीन बेटियों प्रतिज्ञा भाबर, चीनू डोडियार, स्वाति भूरिया और अर्चना तोमर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले को गौरवान्वित किया।
इसके साथ ही फरवरी 2026 में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल वेटलिफ्टिंग गेम्स में भी मध्यप्रदेश और झाबुआ जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए शीला डामोर, चीनू डोडियार और अर्चना तोमर ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
हाल ही में 15 फरवरी 2026 को देवी अहिल्या द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में झाबुआ की दो बेटियों प्रियंका भाबोर और छाया मावी ने मेडल जीतकर जिले का नाम रोशन किया। वहीं छाया मावी का चयन बॉक्सिंग में ऑल इंडिया प्रतियोगिता (पंजाब) के लिए भी हुआ है।
इन सभी उपलब्धियों के पीछे सुनीता सुशील वाजपेई का अथक परिश्रम और समर्पण है। वह अपनी व्यायामशाला में बेटियों को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
आज एक महिला अपने कंधों पर बेटियों का भविष्य संवारने का जिम्मा उठाकर समाज के लिए प्रेरणा बन रही है। उनके प्रयासों से झाबुआ जिले की बेटियाँ खेलों के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को छू रही हैं और पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं।




