सारंगी

बावड़ी गांव के युवा उन्नत किसान ने नेट हाउस में खीरे की खेती करके लाखों कमाए…

सारंगी@संजय उपाध्याय

झाबुआ जिले में अब युवा भी आधुनिक खेती के जरिए मुनाफा कमा रहे है। इस कड़ी में बरवेट क्षेत्र के ग्राम बावड़ी के युवा प्रगतिशील किसान गोपालसीह राठौर भी इसी तकनीक से खीरे की खेती कर रहे है। जिससे उन्हें काफी फायदा हुआ है।

नेट हाउस में खीरे की खेती आधुनिक और संरक्षित खेती का एक बेहतरीन उदाहरण है, जिसके जरिए किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उन्नत किस्मों और सही प्रबंधन के साथ खीरे की पहली तुड़ाई आमतौर पर पौधे रोपाई के 35 से 45 दिन बाद शुरू होती है। लेकिन ग्राम बावड़ी के किसान गोपाल सिंह राठौर ने पौधे रुपाई के 29 दिन में पहली तुड़ाई करके 15 कुंटल उत्पादन प्राप्त किया। जिसको 24 रुपए प्रति किलो के भाव से मंडी में बिक्री कर दी।
गोपाल सिंह राठौर किसान परिवार से है। इनके पिता पहले परंपरागत खेती किया करते थे। आधुनिक युग को देखते हुए इन्होंने 2022 परंपरागत खेती को छोड़ नेट हाउस की खेती की ओर बढ़ने लगे। अब नेट हाउस के जरिए खीरे की खेती कर रहे हैं, और अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे है।

युवा किसान गोपाल सिंह राठौर ने बताया कि संरक्षित खेती की इकाई की शुरुआत एक एकड़ में नेट हाउस लगाकर की, जिसमें 28 लाख 40 हजार रुपए की लागत आई। जिसमें 14 लाख 20 हजार की सब्सिडी सरकार की ओर से प्राप्त हुई। इसमें क्राप्ट ब्सिडी नही मिली है। किसान का कहना है कि नेट हाउस की सब्सिडी जमा हुई लेकिन क्राप्ट की सब्सिडी अभी तक नही आई है। इस नेट हाउस मैं पहली फसल खीरे की लगाई। पहली ही फसल से ही नेट हाउस में आया खर्चा वसूल हो गया। खीरे की फसल में अच्छा मुनाफा देखते हुए, चार माह बाद एक एकड़ का एक और नेट हाउस लगवाया। इसके साथ ही एक 15 हजार स्क्वेयर फीट का आधुनिक तालाब का निर्माण भी करवाया, जिसमे बरसात का पानी स्टोरेज कर गर्मी में फसलों की सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। अब मेरे पास गर्मी में पानी के साथ साथ दो एकड़ नेट हाउस भी हैबजिस्मे साल की दो फसल लेता हु।

गोपाल सिंह राठौर ने बताया कि कम जमीन होने की वजह से ठीक से गुजारा नहीं हो पाता था। वर्ष 2022 में बागवानी के बारे में पता चला था। तब से ही उन्होंने नेट हाउस के जरिए खेती करने का निर्णय लिया था। गांव में सबसे पहले उन्होंने ही नेट हाउस जरिए खेती की शुरुआत की थी। अब उनके गांव में ओर भी किसान नेट हाउस के खेती के बारे में जानकारी लेने आते हैं। उन्होंने बताया कि दो एकड़ में नेट हाउस के जरिए सालाना 15 से 18 लाख रुपये कमा रहे है। उधनिकी विभाग की ओर से समय-समय पर फसलों के बारे में जानकारी मिलती रहती है। जिससे फसलों में अच्छा उत्पादन भी हो रहा है।

*नेट हाउस में खीरे की खेती को लाभ*
किसान गोपाल सिंह राठौर बताते है कि नेट हाउस में खीरा की फसल लगाने से फसल को मौसम की मार (तेज धूप, आंधी-तूफान) और कीटों से बचाया जाता है, जिससे पैदावार खुले खेत के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है।

*उपज और आय:-*
नेट हाउस में खीरे के प्रति पौधे से 4 से 6 किलो तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। किसान एक एकड़ में एक फसल चक्र (लगभग 3 महीने की तुड़ाई) में 35 से 40 टन तक खीरा पैदा कर लेते हैं। इन तीन महीनो में 8 रुपए किलो से 25 रुपए किलो तक बिकती है। एवरेज 15 रुपए किलो बिकती है। जिससे पारंपरिक खेती के मुकाबले कई गुना अधिक मुनाफा कमा सकते है।

*तापमान नियंत्रण:-*
खीरे के लिए सबसे अनुकूल तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच अनुकूल होता है। जो की नेट हाउस में तापमान नियंत्रण करता है। जिससे फसलों पर तापमान जा कोई असर नहीं होता। जबकि बिना नेट हाउस के इस भीषण गर्मी में खेती को नुकसान होता हैं, अधिक तापमान होने पर फूल झड़ने लगते हैं।

-तकनीक का उपयोग:-

नेट हाउस खेती में सिंचाई के लिए आधुनिक विधि का उपयोग किया है। मेने पौधे को पानी देने के लिए ड्रिप सिस्टम विधि का उपयोग किया है। जिससे पौधे की जड़ों में कद और पानी नियमित मायरा में दिया जा सकता है। साथ ही मल्चिंग पेपर का उपयोग करके पानी और खाद की बचत की जाती है और खरपतवार भी नियंत्रित रहते हैं।

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