आरटीआई की धज्जियां उड़ा रहा सीएमएचओ कार्यालय! सूचना आयोग की सख्ती के बावजूद नहीं सुधर रही कार्यशैली…

मेघनगर@मुकेश सोलंकी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम की लगातार अनदेखी की जा रही है। जानकारी छिपाने और निर्धारित समय-सीमा में जवाब न देने पर राज्य सूचना आयोग ने कई जिलों के सीएमएचओ पर सख्त जुर्माना लगाया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत किसी भी आवेदक को अधिकतम 30 दिनों के भीतर विभाग से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का कानूनी अधिकार है। लेकिन सीएमएचओ कार्यालयों में पदस्थ लोक सूचना अधिकारी अक्सर इस नियम का पालन नहीं करते। आवेदकों को गुमराह करने या टालमटोल वाले जवाब देने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसके कारण मामलों को प्रथम अपीलीय अधिकारी और अंततः राज्य सूचना आयोग तक ले जाना पड़ता हैं ।
ऐसे मामलो में मे सूचना आयोग सख्त
राज्य सूचना आयोग की सख्ती और जुर्माने की कार्यवाही मे कई मामलों में सूचना आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीएमएचओ अधिकारियों की इस लापरवाही को ‘दुर्भावनापूर्ण’ करार दिया है। सूचना का अधिकार के तहत जानकारी दबाने पर दोषी पाए गए अधिकारियों पर ₹10,000 से लेकर ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया गया है, जिसे उनके वेतन से वसूलने के आदेश दिए गए हैं, पूर्व में कई बार गंभीर मामलों में सूचना आयोग द्वारा अधिकारियों के खिलाफ सख्त निर्देश भी जारी किए गए है।
भ्रष्टाचार की आशंका
सीएमएचओ कार्यालयों में आरटीआई की अनदेखी के पीछे अपने वालों को लाभ पहुंचाने और भ्रष्टाचार को छिपाने की मंशा हो सकती है। दवाइयों की खरीद, अस्पतालों के पंजीकरण , स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्तियों और विभिन्न निविदओ से जुड़े दस्तावेज जानबूझकर दबाए जाते हैं।
नागरिकों के अधिकारों का हो रहा हनन
पारदर्शी व्यवस्था के लिए बने इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य सीएमएचओ कार्यालयों में दम तोड़ रहा है। आम जनता को अपने स्वास्थ्य अधिकारों और सरकारी बजट के खर्चों की जानकारी पाने के लिए महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन भी है।
क्षेत्रीय संचालक का आदेश बेअसर
मेघनगर के आवेदक द्वारा मोबिलिटी वाहन निविदा संबंधी जानकारी चाहि गई थी जिसके लिए विभाग द्वारा मांग की गई राशि जमा करने के बाद भी निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नही होने एवं अधिकारियों द्वारा लगातार टालम टोल करने पर क्षेत्रीय संचालक को अपील की गई, जहां से क्षेत्रीय संचालक द्वारा तुरन्त जानकारी उपलब्ध करवाने का आदेश होने के बाद भी मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए आवेदक को जानकारी ना देना अधिनियम के प्रति उनकी गंभीर लापरवाही को प्रदर्शित कर रहा है।



