संथारा साधक के दर्शनार्थ पहुँचे पूर्व सांसद, व्यक्त की श्रद्धा भावना…

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पेटलावद डेस्क। जैन धर्म की महान तपस्या संथारा साधना में लीन श्रद्धानिष्ठ श्रावक श्री शांतिलाल जी मिश्रीमलजी गादिया के 29वें दिवस पर उनके निवास स्थान पर झाबुआ-अलीराजपुर-रतलाम क्षेत्र के पूर्व सांसद श्री गुमानसिंहजी डामोर श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ दर्शनार्थ पहुँचे। उन्होंने संथारा साधक की कुशलक्षेम (सुखसाता) पूछते हुए इस उच्च आध्यात्मिक साधना के प्रति अपनी गहन आस्था व्यक्त की। इस अवसर पर श्री कृष्णपालसिंहजी राठौर गंगाखेड़ी, प्रदीप पालरेचा सहित अन्य कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
संथारा साधक के सुपुत्र श्री पारस गादिया ने पूर्व सांसद श्री डामोर को संथारा साधना के महत्व एवं प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनके पिताश्री ने अत्यंत दृढ़ मनोबल, संयम और विशिष्ट श्रद्धा के साथ संथारा का संकल्प ग्रहण किया है, जो आत्मशुद्धि और मोक्ष मार्ग की ओर एक महान आध्यात्मिक कदम है।
पूर्व सांसद श्री गुमानसिंहजी डामोर ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संथारा साधना जैन धर्म की एक अत्यंत विशिष्ट और अनुकरणीय परंपरा है, जो आत्मबल, त्याग और आध्यात्मिक उत्कर्ष का प्रतीक है। उन्होंने इसे धर्म साधना का एक विशेष एवं प्रेरणादायी प्रयोग बताते हुए साधक के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा अर्पित की।



