सारंगी

दशा माता व्रत सोलह श्रृंगार कर महिलाओं ने अपने घर,परिवार में सुख समृद्धि बनी रहें इसी मनोकामना के साथ पुजा अर्चना की…

#Jhabuahulchul 

सारंगी@संजय उपाध्याय

नगर में दशा माता व्रत को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला ब्रह्म मुहूर्त में महिलाओं ने पूजा अर्चना की यह व्रत हर साल चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को रखा जाता है इस दिन दशा माता की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान से होती है साथ ही इस दिन व्रत रखने का विधान हैं मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं यह व्रत अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए करती हैं ऐसा माना जाता है की इस व्रत को करने से घर की दशा सुधरती है और दरिद्रता दूर होती है साथ ही इस दिन कच्चे सूत के डोरे का खास महत्व होता है महिलाएं डोरे से पीपल के पेड़ की पूजा करती है पूजा की बाद अपने गले में धारण करती हैं

दशा माता व्रत में डोरे का महत्व

इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले उठ कर स्नान-ध्यान करने के बाद सबसे पहले दशा माता के व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लेती हे महिलाओं को अत्यंत ही पवित्र माने जाने वाले कच्चे सूत से बने 10 तार वाले डोरे को हल्दी में रंगने के बाद इस डोरे में 10 गांठ लगाती है इसके बाद पीपल के पेड़ के तने में 10 बार कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करती है फिर 10 गांठ के डोरे को पूजन के बाद अपने गले में धारण करती है पूजन के बाद दशा माता की कथा कों सुनती है

 

खराब दशा को सुधार देती हैं दशा माता

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक माता की पूजा के बाद इस डोरे को कम से कम एक साल तक पहनना चाहिए वहीं मान्यता है कि वैशाख मास में किसी शुभ तिथि पर इस डोरे को खोल दिया जाता है मान्यता है की यह पवित्र धागा आपकी जिंदगी में सुख समृद्धि लेकर आता है साथ ही रिश्तों में खुशहाली बनी रहती है मां की कृपा से घर में धन , धान्य संपत्ति बनी रहती है साथ ही किसी भी प्रकार की कमी नहीं होती है।

दशा माता व्रत के पहले सभी माता बहनें घर की साफ-सफाई करती है

पुराने झाड़ू या बेकार कचरे को घर से बाहर निकाल दिया जाता है ताकि लक्ष्मी जी का वास हो सके।

इस व्रत में पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है

सभी महिलाएं एक साथ बैठकर दशा माता व्रत कथा का

सुनतीं हैं इस व्रत में नल और दमयंती की कथा पंडित द्वारा सुनाई जाती है- मान्यता है कि बिना दशा माता की कथा सुने यह व्रत अधूरा माना जाता है दशा माता की पुजन कर अपने घरों पर भी पुजा अर्चना की जाती है और परिवार के बड़ों से शुभकामनाएं व आशीर्वाद भी लिया जाता है

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!