भक्ति में सराबोर रायपुरिया: पंपावती तट पर श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की धूम

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रायपुरिया@राजेश राठौड़
पवित्र पावन पंपावती नदी के पावन तट पर पाटीदार समाज द्वारा डेढ करोड़ की लागत से नव निर्मित श्रीराम मंदिर में देवीय प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन बड़ी ही धूमधाम के मनाया जा रहा है। जिसमे अल सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालु पुण्य लाभ लेने के लिए पहुंच रहे है। नगरवासी सुबह जल्दी उठकर यज्ञशाला की परिक्रमा लगाकर पुण्य अर्जित कर रहे है जो कि रात्रि दस बजे तक यह दौर चलता रहता है। हालाकि यज्ञशाला हवन में वैदिक मंत्रोपचार के समय परिक्रमा थम जाती है, लेकिन हर कोई पुण्य लाभ लेने से कोई भी वंचित नही रह रहा है। लगातार सात दिनों तक आयोजन स्थल पर नगर भोज का आयोजन भी समिति द्वारा रखा जा रहा है, जिनमे हजारों श्रद्धालु भोजन प्रसादी का लाभ ले रहे है। जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। पूरा रायपुरिया नगर भगवामयी बनी हुई है।
*प्राण प्रतिष्ठा अत्यंत पवित्र, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक*
श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के यज्ञाचार्य आचार्य देवेंद्र शास्त्री धरियाखेडी मंदसौर वाले ने बताया कि साप्ताहिक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव सनातन धर्म में एक अत्यंत पवित्र, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक आयोजन है, जिसके माध्यम से किसी विग्रह (मूर्ति) में देवत्व की स्थापना की जाती है। यह आयोजन सात दिनों तक चलता है और इसमें विधि-विधान, मंत्रोच्चार और भक्ति का अनूठा संगम हो रहा है। और रायपुरिया नगर में यह देखने को मिल रहा है।
आचार्य श्री शास्त्री ने व्यास पीठ से सप्तदिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पांचवें दिन मंगलवार का देवी दुर्गा महायज्ञ अनुष्ठान अत्यंत भक्तिभाव और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ, जिससे संपूर्ण पांडाल हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा। पांचवे दिन की मुख्य गतिविधियों में विशेष रूप से देवपूजन यज्ञ स्वहाकार, न्यास विधान, हवन और मिष्ठानाधिवास (मिष्ठान में अधिवास) शामिल होते है।
उन्होंने पांचवें दिन के अनुष्ठान का मंत्रोपचार करते हुए यज्ञ के सभी यजमानों को सुबह के सत्र में वेदमंत्रों की ध्वनि के बीच हवन कुंड में आहुतियां दिलवाई। उसके बाद प्रतिमाओं को मिष्ठाननाधिवास करवाया। इस अनुष्ठान में मूर्ति को मीठे पदार्थों (जैसे चीनी , गुड़, मिष्ठान) में अधिवासित (रखा) किया जाता है, जो दिव्यता के पोषण का प्रतीक है। मंत्रोपचार के साथ अधिवास का महत्व को समझते हुए बताया कि प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा से पूर्व मूर्ति को विभिन्न अनाजों, फलों, जल और मिष्ठान में रखा जाता है, ताकि मूर्ति की सूक्ष्म शुद्धि हो सके और वह चैतन्य हो सके।
प्राण प्रतिष्ठा के पांचवें दिन वास्तु शांति का पाठ कराया। जिसमे वास्तु शांति की प्रक्रिया भी की गई, ताकि अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु और आकाश सहित पूरे वातावरण शांति प्राप्त हो सके। इस भव्य आयोजन के दौरान सभी कलश पात्रों, घंटा, ध्वजा दंड जिनकी स्थापना की जाना है उनकी पूजा भी की गई, जिनको पवित्र जल से स्नान कराया गया।
*भागवत वक्ताओं का सम्मान*
सप्त दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर आयोजन स्थल पर धार्मिक आयोजन हो रहे है। जिसमे तीन दिवसीय नानीबाई का मायरा का आयोजन ब्राह्मणखेडा पंडित श्याम सुंदर त्रिवेदी में मुखारविंद से श्रवण करवाए जा रहा है। जिसमे आसपास के क्षेत्र हजारों की संख्या में लोग पहुंचा रहे है। इस दौरान यज्ञाचार्य पंडित देवेंद्र शास्त्री ने व्यास पीठ पर पहुंच कर कथा वाचक श्यामसुंदर त्रिवेदी का शाल श्रीफल और अंग व्रस्त पहनकर सम्मान किया। इस दौरान यज्ञाचार्य देवेंद्र शास्त्री ने आशीष वचन देकर आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नानालाल पाटीदार पूर्व जनपद अध्यक्ष, हरिराम पाटीदार शिक्षक, राधेश्याम पाटीदार बनी, पंकज पाटीदार बनी, विपुल लोढ़ा बरवेट, जगदीश प्रजापत आदि ने व्यास पीठ पर जाकर आशीर्वाद लिया।



