सारंगी

भागवत कथा भक्तों को ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है भगवान की भक्ति से किसी भी कष्ट को दूर किया जा सकता है : साध्वी श्री सुगना बाईसा…

#Jhabuahulchul 

सारंगी@संजय उपाध्याय

सारंगी श्री संकट मोचन सरकार बरवेट के सानिध्य में सर्व हिंदू समाज द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मुख्य रूप से भक्त ध्रुव चरित्र, भक्त प्रह्लाद प्रसंग और नरसिंह जी का माहिरा की कथा सुनाई। कथा व्यास श्री सुगूना बाईसा गौसेवा कुंज उज्जैन ने ईश्वर की लीलाओं को सुनाते हुए कहा कि बुराई पर अच्छाई और भक्ति की शक्ति की जीत निश्चित होती है। तीसरे दिन की कथा में समुद्र मंथन की कथा का भी वर्णन करते हुए कहा कि जो हमारे मन के भीतर चलने वाले अच्छे और बुरे विचारों के मंथन का प्रतीक है।

साध्वी श्री सुगूना बाईसा ने कहा भगवान की भक्ति से किसी भी कष्ट को दूर किया जा सकता है और अडिग विश्वास से ईश्वर को पाया जा सकता है। इसके बाद भक्त प्रह्लाद और नरसिंह अवतार की कथा का श्रवण करवाते हुए साध्वी जी ने कहा कि हिरण्यकश्यप के अत्याचारों और प्रह्लाद की भक्ति को वृतांत सुनते हुए नरसिंह द्वारा भक्त की रक्षा और पापियों के अहंकार के अंत होता है।

इसके बाद कथा को आगे बढ़ाते हुए समुंद्र मंथन के प्रसंग सुनते हुए कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है, जहाँ अच्छे और बुरे विचार मंथन करते हैं। कथा व्यास द्वारा दानव रूपी बुराई पर देवता रूपी अच्छाई की जीत का संदेश दिया। साथ के बीच-बीच में मनमोहक भजनो की प्रस्तुति से माहौल भक्तिमय हो जाता है। जिस पर महिलाओ और ने खूब नृत्य किया।

कथा को आगे बड़ते हुए साध्वी श्री ने मनु सतरुपा की कथा सुनाई। ध्रुव जी की कथा सुनाई। यज्ञनारायण भगवान के प्राकट्य की कथा सुनाई।कर्दम मुनि की नौ कन्याओं की कथा का वर्णन किया।दक्ष प्रजापति के घर सती के प्राकट्य होने की कथा का वर्णन किया।

उन्होने कहा कि संत कहते है बंजर भुमि पर किए गए हवन का फल नही मिलता।संत,भगवान को वृक्ष के गोंद का भोग नहीं लगता। शुकदेव जी और राजा परीक्षित के ब्रह्म हत्या संवाद को चरितार्थ किया।जब जब धर्म की हानि होती है,तब तब भगवान जन्म लेते है।इसके बाद नरसी मेहता की कथा सुनाई।वही भक्त मीरा बाई की अनुपम भक्ति को वर्णित किया।भगवान के चौबीस अवतार का विस्तृत वर्णन किया।इस दौरान नारदजी,वराह अवतार,नरसिंह अवतार,कपिल अवतार,दत्तात्रेय अवतार की कथा का वाचन किया।

“माता अनुसुइया जी ने डाल दिए पालना, झुल रहे तीनो देव बन करके लालना” भजन गाकर अनुसुइया की कथा का सार बताया।मानव का पहला स्वभाव दया होना चाहिए। कथा में आरती प्रसादी का लाभ नंदलाल पाटीदार नेवलिया। इस अवसर पर विपणन सहकारी संस्था पेटलावद से सेवा निवृत हुए बरवेट के मांगीलाल पाटीदार का समिति की और से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया इस मौके पर विक्रम आयसर पेटलावद, अशोक पाटीदार पेटलावद, जितेंद्र बसेर सारंगी, जितेंद्र गहलोत सारंगी, रजनीश पाटीदार जनपद सदस्य सारंगी, पत्रकार संजय उपाध्याय सारंगी सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!