थांदला

थांदला में प्रथम भगोरिया की धूम: मांदल की थाप पर थिरका आदिवासी अंचल…

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थांदला@उमेश पाटीदार 

जिले का प्रथम भगोरिया हाट आज थांदला नगर में हर्षोल्लास और पारंपरिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यद्यपि इस वर्ष पलायन की स्थिति के चलते भीड़ आंशिक रूप से कम रही, फिर भी भगोरिया की मस्ती और रंगत में कोई कमी नहीं दिखी।

भगोरिया में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की गैर आकर्षण का केंद्र रही। भाजपा की ओर से पूर्व विधायक कलसिंह भाबर, भाजपा नेता विश्वास सोनी, नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि सुनील पणदा, मंडल अध्यक्ष बंटी डामोर, रोहित बैरागी, जितेंद्र राठौड़ सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। वहीं कांग्रेस की गैर का नेतृत्व विधायक वीरसिंह भूरिया ने किया। उनके साथ जसवंत भाबर, गेंदाल डामोर, चेनसिंह डामोर, अक्षय भट्ट, वीरेंद्र बारिया, आनंद चौहान सहित कई पदाधिकारी शामिल हुए। जयस पार्टी और छुट्टा मजदूर संघ ने भी जोश के साथ उपस्थिति दर्ज कराई।

पारंपरिक वेशभूषा में सजी युवतियां बनीं आकर्षण

हजारों की संख्या में ग्रामीण मांदल की थाप और बांसुरी की धुन पर थिरकते नजर आए। पारंपरिक गेर और रंग-बिरंगी वेशभूषा में पहुंची युवतियां भगोरिया का सबसे बड़ा आकर्षण रहीं। पूरा नगर गुलाल और उल्लास से सराबोर दिखा।

भगोरिया मेला मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आदिवासी अंचल में इसका विशेष ऐतिहासिक महत्व माना जाता है। पूर्व विधायक कलसिंह भाबर के अनुसार, भगोर नामक गांव माताजी के श्राप से उजड़ गया था और पुनः बसने की खुशी में वहां वार्षिक मेला शुरू हुआ। बाद में अन्य कस्बों में भी यही परंपरा प्रारंभ हुई और इसका नाम भगोरिया पड़ गया।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, होली से सात दिन पहले लगने वाले हाट को प्राचीनकाल में गुलालिया हाट कहा जाता था, जो समय के साथ भगोरिया हाट के नाम से प्रसिद्ध हो गया। रियासत काल में राजा और जागीरदार होली की गोट के रूप में नगदी व वस्तुएं प्रजा को वितरित करते थे। आज यह भूमिका जनप्रतिनिधि निभा रहे हैं।

नगर परिषद थांदला द्वारा प्रमुख चौराहों पर टेंट और मीठे शरबत की व्यवस्था की गई। मुख्य नगर पालिका अधिकारी कमलेश जायसवाल, इंजीनियर पप्पु बारिया, अंशुल परिहार, गौरांक सिंह राठौर, यशदीप अरोरा सहित कर्मचारियों ने व्यवस्थाएं संभालीं।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत एसडीओपी एवं थाना प्रभारी अशोक कनेश अपने दल-बल के साथ नगर में लगातार भ्रमण करते रहे, जिससे भगोरिया शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।

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