स्व. कनकमल जी मांडोत के नेत्रदान के माध्यम से दी गई अमर ज्योति , दो नेत्रहीनों को मिलेगी रोशनी..

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झकनावदा@नारायण राठौड़
कहते हैं कि जीवन भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन अच्छे कर्म अमर हो जाते हैं। नगर के वरिष्ठ समाजसेवी स्व. कनकमल जी मांडोत के देहावसान के पश्चात उनके परिवारजनों ने संवेदनशीलता और मानवता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। उनके इस महान निर्णय से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि और नया जीवन मिलने की राह प्रशस्त हुई है। परिवार की ओर से तेरापंथ युवक परिषद के सचिव शुभम कोटड़िया को नेत्रदान की सूचना दी गई तथा पुत्र प्रकाश मांडोत की सहमति से यह पुनीत कार्य सम्पन्न हुआ। परिषद के समन्वय एवं अभातेयुप नेत्रदान प्रदेश प्रभारी पीयूष जी दख के विशेष सहयोग से बड़नगर स्थित गीता भवन न्यास समिति की टीम 90 किलोमीटर की दूरी तय कर झकनावदा पहुँची और विधिवत नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। परिषद अध्यक्ष श्रेयांश वोहरा ने बताया कि इस कार्य में पीयूष जी दख के सहयोग से गीता भवन न्यास समिति के डॉ. G. L. दादरवाल सर एवं उनकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर परिवार के अनेक सदस्य एवं तेरापंथ सभा अध्यक्ष विजय जी वोहरा , सभा मंत्री अजय कुमार वोहरा , पूनमचंद जी कोठारी , श्रेणिक जी कोठारी आदि , तेरापंथ युवक परिषद से नयन मांडोत , मुकेश कोठारी , अर्पित वोहरा , अभय वोहरा आदि सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के इस साहसिक और समाजोपयोगी निर्णय की सराहना की। डॉ. G. L. दादरवाल सर ने बताया कि नेत्रदान महादान है यह किसी के अंधकारमय जीवन में प्रकाश भरने का माध्यम है। यदि प्रत्येक परिवार इस दिशा में जागरूकता दिखाए, तो समाज से अंधत्व की पीड़ा को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही डॉ. दादरवाल जी ने नेत्रदान से जुड़ी कई जानकारी नगर वासियों को बताई !
अंत में परिषद ने नगरवासियों से अपील की कि वे नेत्रदान के प्रति जागरूक बनें और अपने परिवार में भी इस विषय पर सकारात्मक चर्चा करें, ताकि मृत्यु के पश्चात भी हमारा जीवन किसी और के लिए प्रकाश का कारण बन सके।





