सरकारी गेहूं खरीदी की तारीख बढ़ने से उलझन में किसान पूर्व जनपद उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह राठौर ने सरकार पर उठाए सवाल….

सारंगी@संजय उपाध्याय
समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने की तारीख बढ़ाए जाने से किसानों में खासा आक्रोश हे मध्य प्रदेश शासन द्वारा पहले सरकार द्वारा गेहूं खरीदी तारीख 15 मार्च बताई थी उसके बाद 1अप्रैल उसके बाद 10 अप्रैल से खरीदी का निर्णय लिया गया है खरीदी लेट होने से किसानों में नाराजगी है किसानों का कहना है बैंक कर्ज जमा करने की 28 मार्च आखिरी तारीख थी खरीदी नहीं होने के कारण बैंकों में किसान कर्ज जमा नहीं करने के कारण 70% किसान डिफाल्टर हो गए हैं लगातार मौसम का मिजाज बदल रहा है और बारिश की वजह से फसल खराब होने का खतरा बना हुआ है ऐसे में उपज को सुरक्षित रखना भी किसानों के लिए चुनौती बन रहा है इस मामले में किसान हीरालाल पाटीदार , रवि पटेल, राजू भूरिया , कालू खराड़ी, गिरधारी लाल पाटीदार ने बताया 1 अप्रैल से खरीददारी शुरू होना थी किसानो को पैसे की भी जरूरत है बैंक में कर्ज भी जमा करवाना है बाजार में भाव भी कम मिल रहे हैं किसानों को आ रही परेशानी को लेकर योगेंद्र सिंह राठौर ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरा है उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसान अपनी फसल को कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर है और इधर-उधर भटक रहै हे सरकार खरीदी नहीं कर रही है और बहाने बना रही है ऐसे में यह किसानों के साथ एक तरफ से गलत हो रहा है क्योंकि समय पर खरीदी नहीं होने से किसान परेशान है जब गेहूं खरीदी की तारीख बडाई बैंकों में लोन जमा करने की तारीख क्यों नहीं बडाई किसानों के पास बैंकों में लोन जमा कराने के लिए पैसा नहीं है गेहूं खरीदी नहीं हुई है ऐसे में किसान करें तो क्या करें किसानों ने सरकार से मांग की है बैंक कर्ज जमा करने के लिए सरकार को विचार कर तारीख बढ़ाना चाहिए
बे मौसम बारिश ने बढ़ाई चिंता : बे मौसम बारिश के कारण सरों की चिंता बढ़ गई है उन्हें फसल नुकसान का डर बना हुआ है गुरुवार शाम को क्षेत्र में जोरदार बारिश हुई जिससे गेहूं की फसल के नुकसान होने के बात भी सामने आ रही है कई किसानों की फसल काटने के बाद उपज खलिहान में ही पड़ी है
किसान रवि पटेल, गिरधारी लाल पाटीदार, हीरालाल पाटीदार , सचिन पाटीदार , कालू खराड़ी, विजय पाटीदार , विमल पाटीदार तथा आसपास ग्रामीण क्षेत्र के किसानों ने सरकार से मांग की है अगर 10 अप्रैल को खरीदी शुरू नहीं होती है और आगे तारीख बढ़ाई जाती है तो किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन की राह अपनाएंगे जिसकी समस्त जवाबदारी प्रदेश सरकार की रहेगी




