सामाजिक सद्भाव बैठक में एकता, समरसता और राष्ट्र उत्थान का संकल्प…!

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पेटलावद डेस्क। नगर में रविवार को आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में समाज की एकता, समरसता और राष्ट्र निर्माण पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर प्रांत ग्राम विकास प्रमुख एवं झाबुआ जिला पालक श्री सोहनलाल परमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि सामाजिक सद्भाव खंड प्रमुख श्री रणछोड़ आंजना ने विशेष रूप से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में नगर के 42 समाजों के प्रमुखों और प्रतिनिधियों ने सहभागिता दर्ज कर एकजुटता का परिचय दिया।
बैठक का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की जयघोष के साथ हुई जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत हो गया। इसके पश्चात सभी गटनायकों द्वारा समाज प्रमुखों का परिचय कराया गया, और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने अपने समाज में चलाई जा रही सकारात्मक एवं प्रेरणादायक गतिविधियों की जानकारी दी।

समाजजनों ने सकारात्मक बाते रखी
इस दौरान कई समाजों ने अपनी विशेष पहलों का उल्लेख किया, जिनमें सामूहिक विवाह आयोजन, सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार, गरीब परिवारों की सहायता, कुरितियों का उन्मूलन, तथा शिक्षा और संस्कार आधारित कार्यक्रमों का संचालन प्रमुख रूप से शामिल रहा।
अपने उद्बोधन में श्री सोहनलाल परमार ने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होकर राष्ट्र उत्थान और भेदभाव-मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रसेवकों ने स्वतंत्रता के लिए जो आहुति दी, वह किसी एक जाति या संप्रदाय के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के लिए थी। इसलिए आज हमें भी उसी भावना से समाज में सद्भाव, एकता और एकात्म हिंदुत्व को सशक्त बनाना है।
हिन्दू समाज बगीचा है
उन्होंने आगे कहा — “हिंदू समाज की सभी जातियां एक बगीचे के विभिन्न पुष्पों की तरह हैं, और इन सभी पुष्पों से ही समाज की वास्तविक शोभा बढ़ती है। हमें संस्कारों, चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता की दिशा में कार्य करना चाहिए।”
पंच परिवर्तन को अपनाये
श्री परमार ने संघ के पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें कुटुम्ब प्रबोधन, नागरिक शिष्टाचार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं, जिन पर प्रत्येक समाज को विशेष ध्यान देना चाहिए।
जाती व्यवस्था मजबूत कड़ी बने
उन्होंने यह भी कहा कि जाति व्यवस्था समाज की कमजोरी नहीं बल्कि एक सशक्त कड़ी बन सकती है, यदि हम सभी मिलजुलकर एक-दूसरे का सहयोग करें। समाज का दायित्व है कि वह अपने हर सदस्य को साथ लेकर चले ताकि राष्ट्र उत्थान की दिशा में कदम और मजबूत हों।
कुटुंब प्रबोधन की पुस्तक भेंट की
कार्यक्रम के अंत में सभी समाज प्रमुखों को ‘कुटुम्ब प्रबोधन’ की पुस्तिकाएं भेंट की गईं। इसके बाद सामाजिक एकता और समानता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सभी समाज प्रमुखों ने एक ही पंक्ति में बैठकर सामूहिक भोजन किया।
यह बैठक न केवल सामाजिक सद्भाव और संगठन की दृष्टि से महत्वपूर्ण रही बल्कि इसने नगर में राष्ट्रप्रेम, एकता और समरसता की नई चेतना का संचार किया।




