रायपुरिया के तेजस्व शुक्ला ने नेशनल कुलिनरी ओलंपियाड में जीता गोल्ड मेडल…

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रायपुरिया@राजेश राठौड़
कहा जाता है कि यदि एक रास्ता बंद हो जाए, तो अपनी प्रतिभा और जुनून के दम पर नया रास्ता खुद बनाया जा सकता है। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है झाबुआ जिले के ग्राम रायपुरिया के होनहार युवा तेजस्व रजनीकांत शुक्ला ने। तेजस्व ने हाल ही में चेन्नई में आयोजित भारत की सबसे बड़ी शेफ प्रतियोगिता कुलिनरी ओलंपियाड में प्रथम स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर-
सेंट मेरी स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने वाले तेजस्व ने अपने माता-पिता की इच्छानुसार मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कोटा में रहकर नीट की तैयारी की। हालांकि, दो प्रयासों के बाद भी अपेक्षित सफलता न मिलने पर उन्होंने हार मानने के बजाय अपने शौक पाककला को ही अपना करियर बनाने का साहसिक फैसला लिया।
राष्ट्रीय स्तर पर फहराया परचम-
तेजस्व ने हैदराबाद की प्रतिष्ठित कुलिनरी एकेडमी ऑफ इंडिया में प्रवेश लिया और उस्मानिया यूनिवर्सिटी से शेफ की डिग्री के दौरान लगातार पांचों सेमेस्टर में कॉलेज टॉप किया। उनकी इसी प्रतिभा का लोहा अब देश ने भी माना है। साउथ इंडियन शेफ एसोसिएशन द्वारा चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के कुलिनरी ओलंपियाड में देश के दिग्गज शेफ के बीच मुकाबला करते हुए तेजस्व ने प्रथम स्थान हासिल किया और 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार जीतकर अपनी एकेडमी का गौरव बढ़ाया।
करियर की नई उड़ान-
तेजस्व की इस असाधारण उपलब्धि का फल उन्हें करियर के शुरुआती दौर में ही मिल गया है। अपनी डिग्री के अंतिम सेमेस्टर के तुरंत बाद वे रेडिसन ब्लू, चेन्नई जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में सीनियर मैनेजर के पद से अपने पेशेवर सफर की शुरुआत करेंगे।
तेजस्व की इस सफलता पर उनके परिजनों, मित्रों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
शौक को बदला कैरियर में
”मैंने पहले डॉक्टर बनने का प्रयास किया था, लेकिन सफल न होने पर मैंने अपने शौक को करियर में बदला। इस निर्णय में मेरे माता-पिता का पूर्ण सहयोग रहा। मेरा मानना है कि युवाओं को करियर के चुनाव के समय हमेशा एक वैकल्पिक रुचि को भी जीवित रखना चाहिए।”
-शेफ तेजस्व रजनीकांत शुक्ला



