रायपुरिया में भादवा माह की परंपरा: मवेशियों की रक्षा और इंद्रदेव से वर्षा की कामना…!

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रायपुरिया@राजेश राठौड़
यहां रायपुरिया गांव में भादवा माह के प्रथम सप्ताह में वर्षों पुरानी परंपरा के तहत आज पूरा गांव स्वेच्छा से बाजार बंद रखकर एक विशेष पूजा में सम्मिलित हुआ है। यह कोई राजनीतिक या सामाजिक आव्हान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आस्था का प्रतीक है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
मवेशियों की रक्षा के लिए अनूठी परंपरा…
गांव के सभी मवेशियों को पेटलावद नाके की ओर ले जाया गया, जहां राजस्थान के प्रसिद्ध जोड़ा बाबाजी मंदिर से लाया गया पवित्र जल उनके ऊपर छींटा गया। ग्रामीणों का विश्वास है कि इस जल से मवेशियों को वर्ष भर किसी भी प्रकार की बीमारी से सुरक्षा मिलती है।
देवी-देवताओं की पूजा और गांव की एकजुटता…
इसके पश्चात गांव के सभी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। तेल, सिन्दूर और श्रीफल चढ़ाकर देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया गया। इस आयोजन में गांव के हर वर्ग के लोग—बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और बच्चे—उत्साहपूर्वक शामिल हुए, जिससे गांव की एकता और सांस्कृतिक समरसता की झलक मिली।
इंद्रदेव से वर्षा की प्रार्थना…
पूजा के बाद सभी किसान अपने खेतों पर जाकर भोजन बनाते हैं और इंद्रदेव को धूप-ध्यान अर्पित करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि इस श्रद्धा से प्रसन्न होकर इंद्रदेव वर्षा करते हैं। पिछले 10–15 दिनों से बारिश का विराम लगने से फसलें मुरझाने लगी थीं, ऐसे में यह पूजा एक आशा की किरण बची है