परवलिया में परंपरागत उल्लास के साथ मनाया गया गाय गोहरी पर्व,,,मन्नतधारियों ने उतारी अपनी मन्नत…!

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परवलिया@उमेश पाटीदार
दीपावली के बाद मनाए जाने वाला पारंपरिक गाय-गौरी पर्व, जिसे गाय गोहरी पर्व भी कहा जाता है, मंगलवार को परवलिया गांव में पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुबह से ही गांव में उल्लास का माहौल था। सजी-धजी गायों और ग्वालों के साथ हजारों ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी। इस पर्व को गायों और ग्वालों के बीच प्रेम एवं आत्मीय संबंध का प्रतीक माना जाता है। गांव के लोगों ने अपनी गायों को रंगों से सजाया, गले में घंटियाँ और फूलों की मालाएं पहनाई, इसी दौरान ग्रामीण महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक “हिडी” गीतों से पर्व को जीवंत बना दिया। गीतों और गऊ पूजन के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

पर्व के दौरान एक अनोखी परंपरा भी देखने को मिली…
मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु गायों के पैरों के नीचे लेटकर अपनी मन्नत उतारते हैं। इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन में खुशहाली और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।गाय गोहरी पर्व ग्रामीण परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जो प्रकृति, मातृत्व और पशु प्रेम की भावना को उजागर करता है। मान्यता है कि गायों में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए इस दिन गाय की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।




