पेटलावद में शिक्षक संयुक्त मोर्चा की विशाल बैठक, तीन सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन…

पेटलावद डेस्क। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर पेटलावद विकासखंड में शिक्षकों द्वारा स्थानीय डाक बंगला परिसर में एक विशाल बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं मातृ शक्ति उपस्थित रही। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरकार का ध्यान शिक्षकों की लंबित मांगों की ओर आकर्षित करते हुए तीन प्रमुख मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की।
मुख्य मांगों में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना, TET परीक्षा को निरस्त करना तथा प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता, ग्रेच्युटी सहित अन्य सेवा लाभ प्रदान करना शामिल रहा। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 1 अप्रैल 2010 से नियम लागू हुए तथा 23 अगस्त 2010 को NCTE द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 2009 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर TET परीक्षा अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है।
शिक्षकों ने सवाल उठाया कि जब डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, पुलिस, IAS एवं IPS अधिकारियों से सेवा के 20-25 वर्षों बाद पुनः कोई परीक्षा नहीं ली जाती, तो शिक्षकों से इतने वर्षों की सेवा के बाद TET परीक्षा लेना अनुचित है। उन्होंने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए विरोध दर्ज कराया।
बैठक के पश्चात शिक्षकों ने डाक बंगला परिसर से नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए श्रद्धांजलि चौक तक रैली निकाली। इस दौरान हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचकर अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
कार्यक्रम में खंड स्त्रोत समन्वयक श्रीमती रेखा गिरी, श्री कैलाश वसुनिया, श्री राजेश पाटीदार, श्री मुकेश पाटीदार, श्री नानूराम गामड़, श्री संजय मखोड़, श्री दिनेश मईड़ा, श्री पप्पूसिंह हटीला, श्री नागरसिंह मुनिया, श्री नीरज कोराने, श्री हिरजी निनामा, श्री रामलाल कटारा, श्री कैलाश भूरिया एवं श्री पूनमचंद कोठारी सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन श्री गोपाल काग द्वारा किया गया, जबकि आभार प्रदर्शन श्रीमती गीता मंडलोई ने व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में श्री पवन खराड़ी, श्री विजय सिंह बारिया, श्री अमरसिंह मुनिया, श्री विजयसिंह गरवाल, श्री आशीष व्यास, श्री शंकरलाल मेहसन, श्री कालुसिंह सोलंकी, श्री दीपक कुमार वसुनिया, श्री दयाराम मईड़ा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।




