नवरात्रि पर मां भद्रकाली के दरबार में श्रद्धा का सैलाब, चमत्कारों की गूंज और जीर्णोद्धार की पुकार………..तीन रूपों में दर्शन देतीं मां भद्रकाली


रायपुरिया@राजेश राठौड़
यहां रायपुरिया क्षेत्र में ऊंचे पर्वतों पर विराजमान मां भद्रकाली और मां चामुंडा के दरबार में नवरात्रि के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह 3:00 बजे से ही भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गईं, जो दिनभर माता के दर्शन के लिए उमड़ती रहीं।
*गरबा पंडाल से गूंजता भक्ति संगीत*…
मंदिर प्रांगण में गरबा पंडाल की स्थापना हो चुकी है, जहां भक्तजन माता की आराधना में झूमते नजर आ रहे हैं। आसपास के गांवों से श्रद्धालु ज्योत लेकर अपने गांवों की ओर प्रस्थान कर रहे हैं, मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से मांगी गई मन्नत मां भद्रकाली अवश्य पूरी करती हैं।
*तीन रूपों में दर्शन देतीं मां भद्रकाली*
श्रद्धालु बताते हैं कि मां भद्रकाली दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं—सुबह बाल स्वरूप, दोपहर में युवावस्था और शाम को बुजुर्ग रूप में दर्शन देती हैं। यह चमत्कार आज भी भक्तों को विस्मित करता है।
*पम्पावती नदी की कलकल ध्वनि में प्रकृति का सौंदर्य*
मंदिर के सामने बहती पम्पावती नदी की कलकल ध्वनि और चारों ओर फैली हरियाली मानो मां के चरणों में प्रकृति ने भी अपनी श्रद्धा अर्पित की हो।
*मंदिर का इतिहास और जीर्णोद्धार की आवश्यकता*
मंदिर के पुजारी दशरथ भारती ने बताया कि 1672 में पहली बार मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ था। इसके बाद रायपुरिया ठिकाने के राजा साहब ने एक बार पुनः इसका पुनर्निर्माण करवाया, लेकिन तब से अब तक मंदिर की स्थिति दयनीय होती जा रही है। पर्वता विभाग और प्रशासन से मंदिर के संरक्षण की अपील की जा रही है।
*गौरवशाली परंपरा की 11वीं पीढ़ी*
पुजारी ने बताया कि उनकी 11वीं पीढ़ी मां भद्रकाली की सेवा में समर्पित है। यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और निष्ठा से निभाई जा रही है।




