मानवता और सेवा की मिसाल, सारंगी में लावारिस सांड की मृत्यु पर युवाओं ने पेश की सनातन धर्म की सीख…

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सारंगी@संजय उपाध्याय
सनातन धर्म में ‘प्राणिमात्र पर दया’ के भाव को सर्वोपरि माना गया है, और इसी भावना का जीवंत उदाहरण आज ग्राम पंचायत सारंगी में देखने को मिला गाँव में एक सांड की अचानक मृत्यु हो जाने के बाद, स्थानीय युवाओं ने न केवल अपनी आस्था का परिचय दिया, बल्कि एक अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय कार्य कर मानवता की मिसाल पेश की।
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सारंगी में एक सांड की आकस्मिक मृत्यु हो गई थी। अक्सर ऐसी स्थितियों में बेसहारा पशुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं होता, लेकिन सारंगी के धर्मप्रेमी युवाओं ने इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझा
युवाओं का सराहनीय कदम
सनातन धर्म की परंपराओं और जीव दया के भाव को ध्यान में रखते हुए, गाँव के युवाओं ने एकजुट होकर सांड के पार्थिव शरीर का ससम्मान अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। युवाओं की इस टोली ने पूरे विधि-विधान और सेवा भाव के साथ इस कार्य को संपन्न किया।
सनातन धर्म हमें हर जीव में ईश्वर का अंश देखना सिखाता है आज युवाओं द्वारा किया गया यह कार्य इसी विचारधारा का प्रतीक है कि हमारे मन और मस्तिष्क में दया की भावना सदैव जीवित रहनी चाहिए
ग्रामीणों ने की प्रशंसा
युवाओं के इस निस्वार्थ सेवा कार्य की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है ग्रामीणों का कहना है कि आज के दौर में जहाँ लोग अपने कार्यों में व्यस्त हैं, वहीं सारंगी के इन युवाओं ने बेजुबान पशु के प्रति जो सम्मान दिखाया है, वह वास्तव में प्रेरणादायक है





