कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश ने तोड़ी किसानों की कमर, मुंह तक आया निवाला छीना…

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रायपुरिया@राजेश राठौड़
नियति के क्रूर खेल के आगे आज अन्नदाता बेबस खड़ा नजर आ रहा है। झाबुआ जिले के पेटलावद अंचल सहित रायपुरिया, सारंगी, बरवेट और बोड़ायता जैसे क्षेत्रों में पिछले तीन-चार दिनों से कुदरत का जो मंजर देखने को मिल रहा है, उसने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसान इस बार बड़ी उम्मीद लगाए बैठे थे कि सोयाबीन और कपास के सीजन में हुए घाटे की भरपाई गेहूं की सुनहरी फसल से हो जाएगी, लेकिन कटाई के ठीक पहले शुरू हुए बेमौसम बारिश और अंधड़ के दौर ने सारे समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जो पूरी तरह पक चुकी थी और बस कटाई का इंतजार कर रही थी, वह अब तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हुई बारिश के कारण जमीन पर बिछ गई है। रोजाना शाम होते ही आसमान में बिजली की कड़क और बादलों की गड़गड़ाहट किसानों के कलेजे को कंपा देती है। दिन में भी रुक-रुक कर हो रही इस बरसात ने पकी हुई बालियों को काला करना शुरू कर दिया है, जिससे गेहूं के खराब होने का पूरा अंदेशा है। प्रकृति का यह कैसा संदेश है कि मेहनत की कमाई घर आने से पहले ही खेतों में तबाह हो रही है? बदहवास किसान अब आसमान की ओर ताक रहा है, क्योंकि उसकी साल भर की पूंजी और परिवार का भविष्य इन भीगती फसलों के बीच फंसा हुआ है। इस बेमौसम मार ने झाबुआ के किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़कर रख दिया है।



