खवासा

केसरिया रंग में रंगा खवासा, RSS के 100 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य हिंदू सम्मेलन संपन्न, देश और धर्म की रक्षा के लिए जागृत हो हिंदू समाज, राम आएंगे जैसे गीतों पर मनमोहक नृत्य, समरसता भोज के साथ हुआ समापन..

#Jhabuahulchul 

खवासा@आयुष पाटीदार/आनंदीलाल सिसोदिया 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्थापना के गौरवशाली 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुवार को खवासा की धरा पर एक ऐतिहासिक और भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया,इस आयोजन में मातृशक्ति, युवाओं और बच्चों के उत्साह ने यह सिद्ध कर दिया कि हिंदू समाज अपनी संस्कृति और स्वाभिमान के लिए पूरी तरह एकजुट है।

सम्मेलन की शुरुआत से पूर्व बुधवार शाम को सुमधुर भजन संध्या का आयोजन किया गया। गुरुवार को श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई,बेंड बाजे से निकली यात्रा में जयघोष के साथ यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रोग्यादेवी मंदिर पहुंची,जहां मुख्य सभा का आयोजन किया गया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ,मुख्य अतिथि श्री श्री 1008 बालयोगी संत महामंडलेश्वर मिथिलाबिहारी दासजी महाराज ने कहा कि हिंदू समाज को जनसंख्या के प्रति सचेत करते हुए कहा कि आज समय की मांग है कि हम अपने परिवार को राष्ट्र रक्षा के लिए समर्पित करें।उन्होंने आह्वान किया कि संतानें देश,धर्म और समाज की सुरक्षा का स्तंभ बनें,तभी भारत को पूर्ण हिंदू राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।

 

मुख्य वक्ता रघुवीर सिंह सिसोदिया (सह प्रांत कार्यवाह, मालवा प्रांत) ने अपने संबोधन में कहा कि संघ पिछले एक दशक से हिंदू संस्कृति और स्वाभिमान को जीवित रखने का कार्य कर रहा है।आज भी स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से गांव-गांव जाकर हिंदुत्व की लौ जलाए हुए हैं। विशेष उपस्थिति मातृशक्ति प्रतिनिधि दिव्या कांकरिया (थांदला) एवं सनातनी कवि दर्शन लौहार ने भी अपनी ओजस्वी वाणी से पूरे पांडाल में ऊर्जा का संचार कर दिया।

 

सम्मेलन में स्थानीय विद्यालय (बचपन स्कूल, सत्य साई स्कूल और आदर्श स्कूल) के विद्यार्थियों द्वारा अत्यंत प्रभावशाली प्रस्तुतियां दी गईं। जिसमे सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार जैसे विचारों के साथ नाटकों के माध्यम से समाज सुधार का संदेश दिया।

 

कार्यक्रम का संचालन ABVP के पूर्व विभाग संयोजक प्रकाश परमार ने किया।सभा के पश्चात हनुमान मंदिर पर ‘समरसता भोज’ का आयोजन किया गया, जिसमें जाति-पाति के भेदभाव को मिटाकर हजारों ग्रामीणों ने एक साथ प्रसाद ग्रहण किया।

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