झाबुआ

गुड फ्राइडे : त्याग, बलिदान और मानवता का अमर संदेश…

झाबुआ@हरीश यादव 

जिले के झाबुआ, मेघनगर, थांदला सहित कई क्षेत्रों में आज गुड फ्राइडे श्रद्धा, शांति और सादगी के साथ मनाया जा रहा है। ईसाई समुदाय के लिए यह दिन गहन आस्था और भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यह वही पवित्र दिन है, जब ईसा मसीह ने मानवता के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

इतिहास की वह घटना जिसने दुनिया को बदल दिया

गुड फ्राइडे का दिन भले “गुड” कहलाता है, लेकिन इसकी पृष्ठभूमि गहरे दुःख और पीड़ा से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह को कठोर यातनाएं देकर सूली पर चढ़ाया गया था।

उन्होंने प्रेम, अहिंसा, भाईचारे और क्षमा का संदेश दिया, जिससे उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। लेकिन यही बात कुछ लोगों को असहज लगी और उन्होंने रोमन शासक पोंटियस पिलातुस के सामने उनके खिलाफ आरोप लगाए।

अंततः उन्हें दोषी ठहराते हुए सूली पर चढ़ाने का आदेश दे दिया गया।

गोलगोथा: जहां अमर हुआ बलिदान

बाइबिल के अनुसार, जिस स्थान पर ईसा मसीह को सूली दी गई, उसे गोलगोथा कहा जाता है। यह स्थान आज भी त्याग और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

अपने अंतिम क्षणों में उन्होंने कहा कि “हे पिता, मैं अपनी आत्मा तुझे सौंपता हूं।”
और इसी के साथ मानवता के लिए अपने प्राणों का त्याग कर दिया।

दोपहर 3 बजे क्यों होती है विशेष प्रार्थना ?
गुड फ्राइडे पर दोपहर 3 बजे चर्चों में विशेष प्रार्थना होती है। मान्यता है कि ईसा मसीह ने इसी समय अपने प्राण त्यागे थे।

इस स्मृति में :
चर्चों की रोशनी मंद कर दी जाती है
मोमबत्तियां बुझा दी जाती हैं
घंटियां नहीं बजाई जातीं

यह मौन और अंधकार उनके अंतिम क्षणों का प्रतीक बन जाता है।

श्रद्धा, सादगी और आत्मचिंतन का अवसर : गुड फ्राइडे पर चर्चों में गहरा सन्नाटा और अनुशासन देखने को मिलता है। श्रद्धालु उपवास रखते हैं, प्रार्थनाएं करते हैं और आत्ममंथन करते हैं।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि प्रेम सबसे बड़ी शक्ति है, क्षमा सबसे बड़ा धर्म और त्याग सबसे बड़ा आदर्श।

आज के दौर में गुड फ्राइडे का संदेश : आज जब समाज कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे समय में ईसा मसीह का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।

नफरत नहीं, प्रेम अपनाएं
बदले की नहीं, क्षमा की भावना रखें
विभाजन नहीं, एकता को बढ़ावा दें

गुड फ्राइडे सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक अमर प्रेरणा है।

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