दिल्ली में गूंजा झाबुआ की भीली भाषा का नाम,,जनजातीय साहित्य महोत्सव में झाबुआ की महिलाओं ने किया प्रतिनिधित्व..!

झाबुआ डेस्क। दिल्ली में आयोजित जनजातीय साहित्य महोत्सव में झाबुआ की सहभागिता दिल्ली में आयोजित जनजातीय साहित्य महोत्सव में मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले से श्रीमती ज्योति मंडोड भील और श्रीमती मंगला गरवाल मेड़ा ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya (भोपाल) तथा Indira Gandhi National Centre for the Arts (दिल्ली) के तत्वाधान में किया गया। महोत्सव में दोनों प्रतिभागियों ने क्षेत्रीय भाषा भीली में स्वयं द्वारा रचित कविता, गीत और कहानी का वाचन किया और बताया कि भीली भाषा का साहित्य बहुत समृद्ध है। श्रीमती ज्योति मंडोड भील मूलतः झाबुआ जिले की निवासी हैं। वे भील जनजाति की संस्कृति के संरक्षण और इतिहास के संग्रहण के कार्य में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। जनजातीय समाज की परंपराओं, जीवन दर्शन और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित व प्रसारित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान में वे भारत घुमक्कड़ समाज दर्शन फाउंडेशन की कार्यकारिणी सदस्य भी हैं, जो ट्राइबल टूरिज्म, ट्राइबल साहित्य, ट्राइबल फूड प्रोसेसिंग, पर्यावरण संरक्षण और गांवों के स्वावलंबन के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में आदिवाणी ऐप के माध्यम से पूछे गए प्रश्नों पर भी उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और भाषा संरक्षण, पाठ्यक्रम निर्माण तथा अनुवाद जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। इस पहल की अधिकारियों द्वारा सराहना की गई और समाज से सहयोग लेने की बात कही गई।
कार्यक्रम में जनजातीय जीवन की संस्कृति, परंपराएं और मौखिक विरासत को विभिन्न आयामों में प्रस्तुत किया गया, जिससे भीलांचल की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।





