बैंक ऑफ़ बड़ौदा के बैंककर्मियों का बेलगाम तानाशाही रवैया पर नहीं लग रहा विराम।


बामनिया जितेंद्र बैरागी।
पेटलावद रोड स्थित बैंक ऑफ़ बड़ौदा के कर्मचारीयों के रवैया को लेकर। व्यापारियों मे दिनों दिन परेशानी बढ़ती जा रही है। कुछ दिनों पूर्व भी राजस्थान पत्रिका समाचार पत्र, दैनिक हिंदुस्तान मेल, अखबार में प्रमुखता से बैंक कर्मियों के रवैया को लेकर समाचार प्रकाशित हुए थे। जब भी मीडिया द्वारा शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाओं द्वारा कुछ गलत होने की दिशा में समाचार प्रकाशित किए जाते हैं। जिस पर उक्त संबंधित विभाग के प्रभारी द्वारा जिस मामले में समाचार लगता है। उस पर मंथन कर पीड़ितों से बातचीत करते हुए। हल निकालने की तथा समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाता है। परन्तु बैंक ऑफ़ बड़ौदा के समाचार प्रकाशित होने के बावजूद। बैंक कर्मियों के रवैया में जरा सा भी फर्क नजर नहीं आया। लोगों का कहना है,मानो ऐसा लगता है। पूरे कुएं में भांग खुली है।
लगातार लग रहे हैं, बैंककर्मियों पर आरोप।
बैंक कर्मियों पर उपभोक्ताओं से नकारात्मक व्यवहार करने का आरोप भी। नगर के उन प्रतिष्ठित व्यापारियों ने लगाए। जो ता उम्र वाद विवाद एवं राजनीतिक से दूर रहे हैं। उन व्यापारियों का सब्र बैंक कर्मियों के बिना सभ्यता वाले व्यवहार ने तोड़ दिया। जिससे वह शिकायत को बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने को मजबूर हो गए।
बात अगर गेट पर खड़े बंदूकधारी की करें तो। बेंक के जिम्मेदारों ने उसको इस तरीके से बोलने की आजादी दे रखी है। कोई भी व्यापारी या किसान जाए। तो 3 बजकर 50 मिनट के बाद उसको अंदर आने की अनुमति बिल्कुल नहीं है। यदि कोई अंदर जाने की गुजारिश करोगे तो। आक्रोश भरे शब्दों से जलील होना निश्चित है।मैनेजर साहब को बैंक द्वारा अधिकृत नंबर पर आप 50 फोन भी लगा दो तो वह अटेंड नहीं किया जाता।
बामनिया के अनाज व्यापारी यसवंत अग्रवाल ने बताया। कि कल (बुधवार) को 3 बचकर 50 मिनट पर ही बैंक पहुंच गया था। मुझे मेरे खाते का स्टेटमेंट लेना था। जिस पर मुझे अंदर जाने लगा। तो गेटमैन ने दरवाजा बंद करते हो बोल के कल आना। और अग्रवाल जी ने यह भी बताया। जब बैंक में पैसा नहीं रहता है। और गाड़ी उनकी पैसे लेकर शाम को 5:00 बजे तक भी आती है। उस समय व्यापारिक कंप्रोमाइज करके बैंक का साथ देता है। उस समय बैंक कर्मी नियम का हवाला नहीं देते हैं। वर्तमान में बैंक कर्मी अपने अनुसार नियम बनाकर चल रहे हैं। मैं ही नहीं बामनिया का पूरा व्यापारिक वर्ग बैंक कर्मियों के इस व्यवहार से परेशान हैं।
बामनिया बैंक ऑफ़ बड़ौदा करीब 4 से 5 माह में मैनेजर सहित पूरा स्टॉप बदला हुआ है। इस बीच ही व्यापारियों को बैंकिंग प्रणाली से परेशानियों का आरोप बैंककर्मियों पर लगा रहे हैं। परंतु वहीं पूरा व्यापारी वर्ग रामकेश मीना जी की तारीफ के पुल बांधते आज भी थकता नहीं है।




