बामनिया में अनोखा और भावनात्मक जन्मदिन, श्मशान घाट पर कटा केक…!

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बामनिया@जितेंद्र बैरागी
जहा आज के दौर में जन्मदिन होटलों में ढोल-नगाड़ों और दिखावे के साथ मनाए जाते हैं, वहीं बामनिया में दो समाजसेवी ने एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी के मन को झकझोर दिया। यहा जन्मदिन श्मशान घाट में मनाया गया केक काटा गया, बधाई दी,लेकिन जश्न के लिए नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता को याद करने के लिए।यह आयोजन बताता है कि जीवन केवल उत्सव नहीं। जिम्मेदारी और संवेदना भी है। श्मशान घाट में मनाया गया यह जन्मदिन हमें यह सोचने पर मजबूर करता है। कि अंत सबका एक ही है, इसलिए अहंकार नहीं, मानवता और समाज सेवा ही सच्चा उत्सव है। बामनिया की धरती पर यह पहल इतिहास में पहली बार देखने को मिली, जहा जन्मदिन को आत्मचिंतन और सामाजिक संदेश से जोड़ा गया।
यह जन्मदिन नहीं, बल्कि जीवन को समझने की एक गहरी सीख बन गया। इस के साथ ही मुक्तिधाम को ओर अधिक सुविधाजनक एवं धार्मिक स्थल की रुपरेखा तैयारियां पर चर्चा हुई।





